जूट मिल अनिश्चितकाल के लिए बंद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jul 2017 5:37 AM (IST)
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मजदूरों के निवाले पर संकट, कई मुद्दों को ले फंसा गतिरोध कल्याणपुर : रामेश्वर जूट मिल को पिछले एक साल से उठा-पटक की स्थिति होने के बावजूद चालू रखा गया था़ इसमें कच्चे माल की आपूर्ति व उत्पादन में लगातार ह्रास दिख रहा था. इसको लेकर स्थानीय प्रबंधन व मिल के मजदूरों में बंदी की […]
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मजदूरों के निवाले पर संकट, कई मुद्दों को ले फंसा गतिरोध
कल्याणपुर : रामेश्वर जूट मिल को पिछले एक साल से उठा-पटक की स्थिति होने के बावजूद चालू रखा गया था़ इसमें कच्चे माल की आपूर्ति व उत्पादन में लगातार ह्रास दिख रहा था. इसको लेकर स्थानीय प्रबंधन व मिल के मजदूरों में बंदी की आशंका लगातार बनी हुई थी. बुधवार को असहज स्थिति तब उत्पन्न हो गयी जब मजदूर काम के लिए पहुंचे, लेकिन कच्चे माल की अनुपलब्धता पर वे बिफर पड़े और वे मिल परिसर में हंगामा पर उतारू हो गये. इसकी पटकथा पंद्रह दिनों पूर्व ही लिखी गयी थी जब मिल प्रबंधन से जुड़े तीनों आला अधिकारी मिल से लगातार गायब रहे.
मजदूर संघ का बताना है कि बिना फैक्टरी मैनेजर के एक दिन भी मिल चालू नहीं रखा जा सकता है़ एक पखवाड़े से भी अधिक दिनों से फैक्टरी मैनेजर परिसर में दिखे ही नहीं. उधर, मिल के मजदूर ग्रेच्युटी का भुगतान वर्ष 2010 से नहीं होने को लेकर प्रबंधन पर दबाव बनाये हुए थे. वहीं मजदूर इपीएफ मद की राशि कंपनी द्वारा मिल का अंशदान सितंबर 16 के बाद से ही लंबित है़ इसको लेकर प्रबंधन मजदूरों के दबाव में असहज महसूस कर रहा था. मिल जानकारों का बताना है कि बीएसएससी के यहां सोलह करोड़ रुपये बकाया है. इसका भुगतान नहीं होने के कारण प्रबंधन पर बढ़ते वित्तीय बोझ को पाट पाना असंभव हो रहा था़ साथ ही निर्मित बैग की मांग भी बाजार में लगातार कम होती गयी़ इसके कारण प्रबंधन का घाटा बढ़ता गया़ इधर, मजदूर भी लगातार प्रबंधन पर दबाव बढ़ाते जा रहे थ़े इससे असहज स्थिति उत्पन्न हो गयी. इतना ही स्थिति से खिन्न कार्यालय कर्मियों ने एक दिन का कलम बंद असहयोग भी किया था़ वहीं मिल जानकारों यह भी बताना है कि कच्चे माल का आपूर्ति कर्ता एजेंसी व अन्य एजेंसियों का मिल की देनदारी बीस करोड़ के पार है़ इसके बाद मजदूर के ग्रेच्युटी मद की राशि चार करोड़ से अधिक है, जबकि इपीएफ मद में तीन करोड़ से अधिक राशि जमा किया जाना है़ इन सभी मांगों को पूरा करने में फिलवक्त तीस करोड़ से अधिक रुपये चाहिए, जो बीएसएफसी के 16 करोड़ के भुगतान के बाद भी इतनी ही राशि की आवश्यकता पड़ेगी़ इसे पाट पाना मौजूदा हालात में संभव नहीं दिख रहा है़
संघ ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप
मजदूर संघ ने चेतावनी देते हुए वादा खिलाफी का आरोप लगाया है. मजदूर संघ की ओर से अमरनाथ सिंह व मोहम्मद नौशाद आलम ने पत्र जारी कर डिप्टी लेबर कमिश्नर के यहां मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए न्याय की गुहार लगायी है़ इसमें प्रबंधन के द्वारा जानकर मजदूरों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है़ वहीं मजदूरों के वर्ष 2010 से ग्रेच्युटी भुगतान नहीं करना व सितंबर 2016 से इपीएफ मद की राशि खाते में जमा नहीं करने जैसे संगीन वित्तीय मामले में हेराफेरी करने का आरोप लगाया. सीपीएम नेता व मजदूरों के हितैषी भोला राय का बताना है कि जानकर प्रबंधन द्वारा मजदूरों के पैसे को दबाये रखने के उद्देश्य से मिल बंद कर मजदूरों के संवैधानिक हक को दबाया जा रहा है. उन्होंने इसके विरोध में चरणबद्ध आंदोलन चलाने की बात कही.
एक साल से भुगतान लंबित
इस बाबत प्रबंधन की ओर से उपाध्यक्ष प्रशासन बीएन झा का बताना है कि बीएसएफसी के उच्चाधिकारियों के हठ धर्मिता के कारण 16 करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान लगभग एक वर्षों से अधिक समय से लंबित है़ इस कारण मिल की वित्तीय स्थिति खराब हो गयी है़ इसको लेकर एक ओर जहां कच्चे माल की आवक व मजदूरों के भुगतान की समस्या उत्पन्न हो गयी. इस कारण मजबूरन मिल को बंद करना पड़ रहा है़
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