समाजवादी राजनीति के वरिष्ठ नेता लक्ष्मी नारायण यादव का निधन, पूरे सौरबाजार क्षेत्र में शोक

Updated:
विज्ञापन
फोटो -सहरसा- फाइल फोटो लक्ष्मी नारायण यादव व जमा लोग  | Prabhat Khabar Network

फोटो -सहरसा- फाइल फोटो लक्ष्मी नारायण यादव व जमा लोग | Prabhat Khabar Network

सौरबाजार प्रखंड के समाजवादी नेता और पूर्व प्रमुख लक्ष्मी नारायण यादव का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. दशकों तक क्षेत्र की राजनीति को दिशा देने वाले यादव जनसेवा के प्रतीक थे. उनके निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.

विज्ञापन

Saharsa News: सहरसा के सौरबाजार प्रखंड से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया. समाजवादी विचारधारा के मजबूत स्तंभ और सौरबाजार के पूर्व प्रमुख लक्ष्मी नारायण यादव का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन के साथ क्षेत्र की एक ऐसी राजनीतिक और सामाजिक पहचान भी मानो विदा हो गई, जिसने दशकों तक गांव, पंचायत और प्रखंड की राजनीति को दिशा दी.

शनिवार को उनके पैतृक गांव अजगैवा में अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा. अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए. पूरे माहौल में एक ही भावना थी कि एक ऐसा जननेता चला गया जिसने पद से अधिक लोगों के भरोसे को महत्व दिया.

लगभग 20 वर्षों तक संभाली सौरबाजार प्रखंड की कमान

लक्ष्मी नारायण यादव लंबे समय से अस्वस्थ थे और शनिवार को उनके पैतृक आवास पर उनका निधन हो गया. वह लगभग 20 वर्षों तक सौरबाजार प्रखंड प्रमुख के पद पर रहे. इससे पहले वह निर्विरोध मुखिया चुने गए थे और जिला परिषद सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं.

उनकी राजनीतिक यात्रा केवल पदों तक सीमित नहीं रही. उन्होंने सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था. हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता और जनसंपर्क लगातार बना रहा. स्थानीय लोग उन्हें ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं जो सत्ता से दूर होने के बाद भी लोगों के सुख-दुख में बराबर शामिल रहते थे.

गांव के विकास और गरीबों की मदद को बनाया जीवन का उद्देश्य

ग्रामीणों का कहना है कि लक्ष्मी नारायण यादव का घर हमेशा आम लोगों के लिए खुला रहता था. किसी गरीब परिवार की समस्या हो, सड़क निर्माण का सवाल हो, विद्यालय की जरूरत हो या किसी सामुदायिक कार्य का मुद्दा, वह हर मामले में आगे रहते थे.

उनके कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ निष्पक्ष रूप से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई. यही कारण है कि आज भी बुजुर्गों से लेकर युवा पीढ़ी तक उनके योगदान की चर्चा करती है.

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

शनिवार शाम जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में लोग उनके साथ चल पड़े. कई लोगों की आंखें नम थीं और पूरे रास्ते "लक्ष्मी बाबू अमर रहें" के नारे गूंजते रहे. यह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार का नहीं, बल्कि उस सामाजिक सम्मान का प्रतीक था जो उन्होंने अपने जीवन भर अर्जित किया.

उनके परिवार में दो पुत्र अजय कुमार और पंकज कुमार, तीन पुत्रियां और अन्य परिजन हैं. उनके बड़े पुत्र और पूर्व मुखिया अंजनी यादव का पहले ही निधन हो चुका है.

Saharsa News: समाजवादी विचारधारा के मजबूत स्तंभ के रूप में याद किए जाएंगे

सौरबाजार और आसपास के इलाके में समाजवादी राजनीति की चर्चा जब भी होगी, लक्ष्मी नारायण यादव का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा. स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, शिक्षा और जनसेवा को प्राथमिकता दी.

युवाओं ने उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद किया जो हमेशा संवाद, सहयोग और सामुदायिक विकास की बात करता था. उनके निधन को क्षेत्र ने केवल एक पूर्व जनप्रतिनिधि की मृत्यु नहीं, बल्कि एक सामाजिक परंपरा और जनसेवा की संस्कृति की बड़ी क्षति के रूप में देखा है.

Also Read: TRE-4 के लिए BPSC को भेजा गया प्रस्ताव हुआ वापस, क्या अब होगा आंदोलन? शोभा अहोतकर से लगाई उम्मीद

Also Read: Financial Package For Bihar: केंद्र सरकार ने बिहार को दिए 10,845 करोड़ रुपये, जानिए आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा


विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन