कोसी के कटाव से नारायण गांव का अस्तित्व खतरे में, दो दर्जन पक्के मकान नदी में समाए

Updated:
विज्ञापन

कोशी नदी | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

कोसी नदी के लगातार बढ़ते कटाव ने सहरसा के नारायण गांव का अस्तित्व खतरे में डाल दिया है. पिछले दो महीनों में सैकड़ों घर नदी में समा चुके हैं, जिससे ग्रामीण हताश और सदमे में हैं. विस्थापन की चिंता के बीच, प्रभावित परिवार प्रशासन से तत्काल राहत और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

विज्ञापन

सहरसा, नवहट्टा. कोसी पूर्वी तटबंध के अंदर सतौर पंचायत के नारायण गांव का अस्तित्व लगातार हो रहे कटाव के कारण खतरे में पड़ गया है. पिछले दो माह से जारी भीषण कटाव के कारण सतौर से लेकर नौला पंचायत तक सैकड़ों घर कोसी नदी में विलीन हो चुके हैं. पिछले एक सप्ताह में नारायणपुर गांव के करीब दो दर्जन परिवारों के पक्के मकान भी नदी में समा गये. वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से बनाये गये आशियाने को अपनी आंखों के सामने नदी में विलीन होते देख पीड़ित परिवार गहरे सदमे में हैं.

विज्ञापन

आंखों के सामने उजड़ रहे आशियाने, टूट रही परिवारों की उम्मीद

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल से उनका आशियाना बच जायेगा. किसी परिवार ने बेटी की शादी के लिए घर का रंग-रोगन कराया था, तो कोई उपनयन संस्कार की तैयारी में घर सजा रहा था. लोगों को उम्मीद थी कि शुभ अवसरों पर इन्हीं घरों में खुशियां और शहनाई गूंजेगी.

लेकिन लगातार बढ़ते कोसी के कटाव ने परिवारों की इन उम्मीदों को तोड़ दिया. देखते ही देखते घर नदी में समाते गये और लोग अपने सामने वर्षों की मेहनत से खड़े किये गये मकानों को उजड़ता देखने को मजबूर हो गये.

दो माह से जारी कटाव, सतौर से नौला तक भारी नुकसान

ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो माह से कोसी नदी के कटाव का सिलसिला जारी है. सतौर से लेकर नौला पंचायत तक कई घर नदी की धारा में समा चुके हैं. पिछले एक सप्ताह के दौरान नारायणपुर गांव में करीब दो दर्जन पक्के मकानों के नदी में विलीन होने से स्थिति और गंभीर हो गयी है.

लगातार कटाव के कारण अब ग्रामीणों को अपने गांव के अस्तित्व की चिंता सताने लगी है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाये जाते तो सैकड़ों परिवारों को अपना घर गंवाने और विस्थापन की पीड़ा से बचाया जा सकता था.

फोटो सहरसा | Prabhat Khabar Network
फोटो - कोसी से कटाव | Prabhat Khabar Network

विस्थापन की चिंता से परेशान हैं कटाव पीड़ित

घर और जमीन गंवाने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अब रहने और रोजमर्रा की जरूरतों की समस्या खड़ी हो गयी है. जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से पक्के मकान बनाये थे, उनके लिए अचानक आशियाना खो देना बड़ा आघात है. ग्रामीणों का कहना है कि कटाव की रफ्तार लगातार बनी रही तो आने वाले दिनों में और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं. ऐसे में प्रशासन से तत्काल प्रभावी कटाव निरोधक उपाय और विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की जा रही है.

कटाव पीड़ितों को उपलब्ध करायी जा रही सामग्री

अंचल अधिकारी मोनी बहन ने बताया कि कटाव पीड़ित परिवारों के लिए प्लास्टिक सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है. अंचल प्रशासन प्रभावित परिवारों की परेशानी में उनके साथ खड़ा है और हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है.

गांव के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट

लगातार हो रहे कटाव ने नारायण गांव के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीण अब केवल अपने घर बचाने की नहीं, बल्कि पूरे गांव को नदी की धारा में समाने से बचाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. लोगों की नजर अब प्रशासन की ओर है कि कटाव रोकने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए आगे क्या प्रभावी कदम उठाये जाते हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन