सहरसा अस्पताल प्रबंधक की पुरानी नियुक्ति फिर सवालों के घेरे में, पूर्णिया की जांच रिपोर्ट आई सामने

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फोटो - अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी | Prabhat Khabar Network

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सहरसा सदर अस्पताल प्रबंधक की पूर्णिया की पुरानी विभागीय जांच रिपोर्ट फिर चर्चा में है. यह रिपोर्ट उनकी नियुक्ति प्रक्रिया और योग्यता पर सवाल खड़े करती है. स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है.

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सहरसा. सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट की हालिया घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच सहरसा मॉडल सदर अस्पताल की अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी से जुड़ी पूर्णिया सदर अस्पताल की पुरानी विभागीय जांच रिपोर्ट फिर चर्चा में आ गई है. उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, पूर्णिया सदर अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक पद पर उनके चयन को लेकर जांच करायी गयी थी. जांच रिपोर्ट में चयन प्रक्रिया और निर्धारित योग्यता से जुड़े कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज किये जाने की बात सामने आती है. हालांकि, इन आपत्तियों के बाद सक्षम स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और संबंधित प्रमाणपत्रों का सत्यापन किस स्तर तक हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी मौजूदा दस्तावेजों से सामने नहीं आती है. ऐसे में पुरानी जांच रिपोर्ट के आधार पर उठ रहे सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है.

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शव को बाइक से ले जाने की घटना के बाद जांच का मामला आया था सामने

यह मामला वर्ष 2017 में पूर्णिया सदर अस्पताल में इलाजरत रानीबाड़ी निवासी शंकर साह की पत्नी सुशीला देवी की मौत के बाद शव को घर ले जाने से जुड़ी घटना के दौरान भी चर्चा में आया था. परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें शव बाइक से घर ले जाना पड़ा. घटना के बाद पूर्णिया प्रशासन की ओर से मामले की जांच करायी गयी थी. हालांकि, उस समय अस्पताल प्रशासन की ओर से लापरवाही के आरोपों से इनकार किया गया था. इसी दौर में अस्पताल प्रबंधक पद पर चयन से संबंधित शिकायत की जांच भी विभागीय स्तर पर कराये जाने की बात दस्तावेजों में सामने आती है.

जांच समिति ने चयन प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं की जांच की

उपलब्ध विभागीय पत्र के अनुसार, पूर्णिया सदर अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक पद पर सिंपी कुमारी के चयन को लेकर शिकायत की जांच के लिए समिति गठित की गयी थी. रिपोर्ट की एक कंडिका में शिकायत को सही पाये जाने का उल्लेख किया गया था. इसके बाद तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पूर्णिया की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की अनुशंसा किये जाने की बात भी दस्तावेज में दर्ज है.

हॉस्पिटल मैनेजमेंट की डिग्री और इंटर्नशिप पर उठे थे सवाल

जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधक पद के लिए निर्धारित हॉस्पिटल मैनेजमेंट की डिग्री और दो वर्ष की इंटर्नशिप से संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता तथा सत्यापन को लेकर सवाल दर्ज किये गये थे. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि चयन के समय निर्धारित शर्तों के अनुरूप अभिलेखों की जांच नहीं किये जाने को लेकर आपत्ति थी. यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विभागीय जांच में दर्ज आपत्ति अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं है कि संबंधित प्रमाणपत्र गलत थे या योग्यता निश्चित रूप से पूरी नहीं थी. इस स्थिति की पुष्टि के लिए मूल शैक्षणिक अभिलेखों और विभागीय सत्यापन रिपोर्ट को देखना आवश्यक होगा.

वर्षों बाद भी सबसे बड़ा सवाल, जांच के बाद क्या हुआ?

पुरानी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच के बाद सक्षम स्तर पर क्या कार्रवाई की गयी. क्या संबंधित शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया था. यदि सत्यापन हुआ, तो उसका परिणाम क्या रहा. वहीं, यदि जांच में उठायी गयी आपत्तियों का बाद में निराकरण किया गया, तो उससे संबंधित विभागीय आदेश और अभिलेख कहां हैं.

इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है. जांच रिपोर्ट में अनुशंसा दर्ज होने के बाद अंतिम प्रशासनिक निर्णय क्या लिया गया, यह जानना भी जरूरी है.

सहरसा में पदस्थापन के बाद फिर सामने आया पुराना मामला

सिंपी कुमारी के सहरसा मॉडल सदर अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक के रूप में पदस्थापन के बाद पूर्णिया की पुरानी जांच रिपोर्ट फिर चर्चा में आ गयी है. अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सहरसा में उन्हें अस्पताल प्रबंधक की जिम्मेदारी किस आदेश और प्रक्रिया के तहत दी गयी.

इसके साथ ही पदस्थापन से पहले उनकी निर्धारित योग्यता, अनुभव और संबंधित शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन हुआ था या नहीं, यह भी विभागीय स्तर पर स्पष्ट किया जाना बाकी है. हाल की घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच पुरानी जांच रिपोर्ट सामने आने से नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं.

स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

मामले में स्वास्थ्य विभाग से पूर्णिया की जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई, संबंधित शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और सहरसा में पदस्थापन से जुड़े आदेश एवं प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है.

ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के संबंध में निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है. यदि पुरानी जांच में दर्ज आपत्तियों का बाद में समाधान हुआ है, तो संबंधित आदेश और सत्यापन रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हो सकती है. वहीं यदि कार्रवाई लंबित रही, तो इसकी वर्तमान स्थिति भी विभाग को स्पष्ट करनी होगी.

सहरसा सदर अस्पताल से जुड़े हालिया विवाद के बीच सामने आई यह पुरानी जांच रिपोर्ट अब स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही और रिकॉर्ड की पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सामने ला रही है.

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