सहरसा का रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर: शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र, नवरात्र और विशेष अवसरों पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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फोटो - सहरसा - रक्तकाली मंदिर मत्स्यगंधा | Prabhat Khabar Network

रक्तकाली मंदिर मत्स्यगंधा | Prabhat Khabar Network

सहरसा के मत्स्यगंधा परिसर में स्थित रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर शक्ति उपासना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. नवरात्र और काली पूजा पर मंदिर का भव्य स्वरूप देखने लायक होता है.

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सहरसा जिले के प्रसिद्ध मत्स्यगंधा परिसर स्थित 'रक्तकाली चौसठ योगिनी मंदिर' कोसी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा व शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां रक्तकाली और उनकी चौसठ योगिनियों के दरबार में सच्चे मन से शीश नवाकर पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन की तमाम बाधाएं दूर होती हैं.

भक्ति और शक्ति साधना का अनूठा संगम

मत्स्यगंधा स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है:

  • अलौकिक अनुभव: मंदिर परिसर में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को शक्ति साधना और असीम शांति की अनुभूति होती है. प्रतिदिन तड़के सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की चहल-पहल बनी रहती है.
  • चौसठ योगिनियों की प्रतिमाएं: मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित चौसठ योगिनियों की दिव्य प्रतिमाएं हैं, जो दूर-दराज से आने वाले साधकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं.
  • आकर्षक लाइटिंग और सौंदर्यीकरण: हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया गया है. शाम ढलते ही मंदिर की भव्य रोशनी और भक्तिमय वातावरण देखते ही बनता है.

नवरात्र और काली पूजा पर सजता है भव्य दरबार

यूं तो यहां सालों भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन विशेष पर्वों पर नजारा अलौकिक होता है:

  • वैदिक मंत्रोच्चार और महाआरती: नवरात्र और काली पूजा के दौरान सुबह की प्रथम आरती से लेकर देर रात तक भजनों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है.
  • विशेष श्रृंगार: पर्व-त्योहारों पर मां रक्तकाली का भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया जाता है. शाम को होने वाली महाआरती में शामिल होकर सैकड़ों श्रद्धालु दीप प्रज्वलित करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

धार्मिक पर्यटन का उभरता केंद्र

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मां रक्तकाली की असीम अनुकंपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है. सहरसा आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस पावन धाम में दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त करते हैं.


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Vinay Kumar Mishra

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By Vinay Kumar Mishra

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