सहरसा के आरण गांव में बनेगा 'मयूर बिहार': प्रभात खबर की खबर पर DM दीपेश कुमार का बड़ा एक्शन; जमीन चिन्हित
सरकारी जमीन का निरिक्षण करते डीएम, डीडीसी, एसडीओ व अन्य | Prabhat Khabar Network
सहरसा के आरण गांव में राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए 'मयूर बिहार' बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. जिला प्रशासन ने गांव में दो सरकारी जमीन के टुकड़ों को इस परियोजना के लिए चिन्हित किया है. यह पहल स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है.
सहरसा, सत्तरकटैया. राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण और सुरक्षित बसेरे के लिए आरण गांव में ठोस पहल शुरू हो गयी है. मोरों के संरक्षण के लिए मयूर बिहार विकसित करने की मांग को लेकर प्रकाशित खबर पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है. शुक्रवार को डीएम दीपेश कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम आरण गांव पहुंची और दो जगह सरकारी जमीन का स्थल निरीक्षण कर उसे चिन्हित किया.
तिलावे नदी और स्वास्थ्य केंद्र के पास जमीन चिन्हित
प्रशासन की टीम ने तिलावे नदी के पास करीब सवा दो एकड़ और स्वास्थ्य केंद्र के पास करीब तीन एकड़ गैरमजरुआ खास जमीन को मयूर बिहार के लिए उपयुक्त मानते हुए चिन्हित किया. डीएम ने सीओ शिखा सिंह को दोनों जमीन की नापी कर नजरी नक्शा सहित प्रस्ताव समर्पित करने का निर्देश दिया.
डीएम ने कहा कि मोरों के संरक्षण के लिए आरण गांव उपयुक्त स्थल है. यहां जल्द मयूर बिहार विकसित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
पेड़-पौधे, तालाब और भोजन की होगी व्यवस्था
डीएम ने बताया कि चिन्हित जमीन पर मोरों के ठहरने के लिए पेड़-पौधे लगाए जायेंगे. पानी की व्यवस्था के लिए तालाब बनाया जायेगा. मोरों के भोजन के लिए झाड़ी विकसित करने की योजना है, ताकि उनके प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बनी रहे.
मयूर बिहार में पशु चिकित्सक और गार्ड की तैनाती भी की जायेगी. डीएम ने वन विभाग के अधिकारी को कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया. इससे पहले शुक्रवार सुबह से ही सीओ और बीडीओ ने सरकारी अमीन के साथ जमीन की मापी शुरू कर दी थी.
वर्षों से आरण में बसेरा करते हैं सैकड़ों मोर
आरण गांव में वर्षों से बड़ी संख्या में मोर बसेरा करते हैं. मोर ग्रामीणों के घर-आंगन, दरवाजे, खेत-खलिहान और पेड़-पौधों के बीच विचरण करते नजर आते हैं. ग्रामीणों के अनुसार गांव में मोरों के लिए प्राकृतिक रूप से अनुकूल वातावरण है.
भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार कुंदन उर्फ झून्नू यादव ने बताया कि मोरों के संरक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है. जंगली जानवर कई बार मोर के बच्चों को मारकर खा जाते हैं. ऐसे में सुरक्षित स्थल विकसित करने की मांग ग्रामीण लंबे समय से करते आ रहे हैं.

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने बढ़ायी सक्रियता
आरण में मोरों के संरक्षण को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद जदयू नेता किशोर कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर मोरों के संरक्षण के लिए ठोस पहल करने की मांग की थी. अब प्रशासन की ओर से मयूर बिहार के लिए जमीन चिन्हित किए जाने से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है. ग्रामीणों का कहना है कि मयूर बिहार के लिए आरण गांव में सरकारी जमीन की कमी नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आरण गांव में मोर देखने पहुंचे थे और मयूर बिहार बनाने की घोषणा की थी.
स्कूल की जमीन से हटेगा अतिक्रमण
ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम ने मध्य विद्यालय आरण की अतिक्रमित जमीन का भी निरीक्षण किया. उन्होंने सीओ को स्कूल की जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया.
अधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद
मौके पर डीडीसी गौरव कुमार, एसडीओ श्रेयांश तिवारी, बीडीओ मो. शारिक अहमद, सीओ शिखा सिंह, फॉरेस्टर मो. अब्दुल सलाम, पीओ शाहनवाज हक, सीआई शशि भूषण सिंह, पंचायत सचिव सत्यनारायण यादव, मुखिया प्रतिनिधि सरोज यादव, सामाजिक कार्यकर्ता अमित कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे.
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