नये वर्ष की नयी उम्मीद बनी महिला पायलट पिंकी

नये वर्ष की नयी उम्मीद बनी महिला पायलट पिंकी लड़कियों ने कहा, बेटियों को अभिशाप नहीं समझें वरदान प्रतिनिधि, सहरसा सदर कोसी क्षेत्र की पहली सहायक महिला लोको पायलट बनी पिंकी की कामयाबी और उनके हौसले की खबर जब अखबारों में सुर्खियां बनी और लोगों ने पिंकी को ट्रेन दौड़ाते देखा तो उन्हें लगा कि […]
नये वर्ष की नयी उम्मीद बनी महिला पायलट पिंकी लड़कियों ने कहा, बेटियों को अभिशाप नहीं समझें वरदान प्रतिनिधि, सहरसा सदर कोसी क्षेत्र की पहली सहायक महिला लोको पायलट बनी पिंकी की कामयाबी और उनके हौसले की खबर जब अखबारों में सुर्खियां बनी और लोगों ने पिंकी को ट्रेन दौड़ाते देखा तो उन्हें लगा कि पिंकी अन्य लड़कियों के लिए पे्ररणा श्रोत है. नये वर्ष में नयी उम्मीद बनी पिंकी अन्य लड़कियों के लिए भी उसकी ऊंची उड़ानों की उड़ने की सपनों को पंख लगा दी है. गया जिले की किसान परिवार में जन्म लेने वाली बिहार की इस होनहार बेटी ने आज समाज के लिए भी सम्मानपूर्वक प्रेरणा श्रोत के रूप में देखे जाने लगी है. बचपन से ही होनहार पिंकी अपने सपने को खुद संजोने का काम कर आज वह काम कर दिखायी है. सलाम है लोको पायलट पिंकी कोछात्रा राजनंदिनी पिंकी की कामयाबी को सेल्यूट करते हुए एक साधारण परिवार की इस बेटी को अब अपना प्रेरणा श्रोत मानने लगी है. इनका कहना है कि देश के अन्य लड़कियों के कामयाबियों के साथ-साथ आज बिहार की बेटी भी पढ़ाई के क्षेत्र से लेकर हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रही है. स्थानीय रमेश झा महिला कॉलेज की छात्रा श्वेता कुमारी ने पिंकी की कामयाबी पर कहा कि बिहार की इस बेटी ने समाज की उस दकियानूसी को करारा तमाचा है जो बेटियों के जन्म को आज भी अभिशाप समझते हैं. शिवपुरी की खुशबू सिंह महिला लोको पायलट पिंकी को ट्रेन दौड़ाते देख अपने खुशियों को रोक नहीं पायी. वह कहती है कि बिहार की किसान परिवार की इस बेटी पिंकी ने जग जाहिर कर बता दिया कि आज के समय बेटी अभिशाप नहीं बल्कि वरदान है. युवा सोच रखने वाली नेहा व निधि ने भी बिहार के बदलते परिवेश में आज पिंकी की कामयाबी को देख बेटी के प्रति गलत सोच रखने वाले मां-बाप को अपनी सोच बदलने की बात कही. ताकि हर बेटी पिंकी की तरह खुद अपने सपने को संजोने के लिए कामयाबी हासिल कर सके और अपने पैरों पर पिंकी जैसी खड़ी हो सके. महिला सशक्तिकरण की सोच रखने वाली लवली व स्वीटी ने कहा कि सिर्फ नारों से नहीं इसके लिए हर लोगों में परिवर्तन होनी चाहिए. ताकि सही मायने में पिंकी जैसी महिला पायलट के रास्ते पर चलकर गांव समाज की हर बेटी अपनी कामयाबी को हासिल कर सके. कल्पना व नंदिनी ने कहा कि जिस दिन बेटियों के प्रति हर लोगों की सोच में परिवर्तन आ जायेगी और बेटे की तरह ही बेटियों को भी खुद अपने रास्ते पर चलने की स्वतंत्रता मिल जायेगी सही मायने में उसी दिन महिला सशक्तिकरण की बात वास्तविकता रूप में सार्थक हो पायेगी. फोटो-पिंकी 38- राजनंदिनीफोटो-पिंकी 39- श्वेता कुमारीफोटो-पिंकी 40- खुशबू कुमारीफोटो-पिंकी 41- नेहाफोटो-पिंकी 42- निधिफोटो-पिंकी 43- लवलीफोटो-पिंकी 44- स्वीटीफोटो-पिंकी 45- कल्पनाफोटो-पिंकी 46- नंदिनी
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