कुहासे की चादर में लिपटा शहर, अलाव की आस में कांपता रहा जिगर प्रभात लाइवसहरसा नगर शीतलहर व कंपकंपाती ठंड ने यूं तो लोगों की दिनचर्या बदल दी है. ठंड के परवान चढ़ने के बावजूद अलाव की व्यवस्था नहीं रहने से लोग ठिठुर कर दिन तो दिन रात भी काटने को विवश हैं. शनिवार को तापमान के नीचे गिरने से परेशानी बढ़ी रही. सर्द रात में प्रभात खबर ने प्रशासनिक व्यवस्था की तफ्तीश की. इस दौरान गरीबों के कल्याण के लिए बनने वाली योजनाएं व सरकार के दावे खोखले साबित हुए. प्रस्तुत है रिपोर्ट: रात 10:30 बजे: रात के सर्द मौसम में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही काफी कम हो गयी थी. इसके बावजूद भारी वाहनों का परिचालन लगातार फॉग लाइट के सहारे जारी था. शहर के बंगाली बाजार में सदर थाना की गाड़ी खड़ी थी. जानकारी मिली कि पुलिस बलों के साथ पहुंचे अधिकारी होटल में भोजन कर रहे हैं. वहां से आगे निकलने पर महावीर चौक पर पुलिस के जवान नदारद थे, लेकिन एक होटल का बाल मजदूर मालिक के जाने के बाद दुकान की फर्श को साफ कर रहा था. यहां अलाव की जरूरत शिद्दत के साथ महसूस हो रही थी.रात 11:15 बजे- अमूमन रोजाना ग्यारह बजे तक यात्रियों की भीड़ से गुलजार रहने वाला सहरसा जंक्शन कोसी एक्सप्रेस के आगमन से पहले सो चुका था. आरक्षण भवन सहित प्लेटफाॅर्म की फर्श पर लोग सोये हुए थे. हालांकि इस वक्त भी सर्दी के सितम पर पेट की आग भारी लग रही थी. रिक्शा चालक डोमी सोनी व पप्पू शर्मा ने बताया कि प्रशासन द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. मजबूरी में पॉलीथिन व पुराने कपड़े जला कर आधी रात में ठंड से राहत पाने की कोशिश करते हैं. रात 12:00 बजे- शहर के प्रशांत सिनेमा रोड, बनगांव रोड, चांदनी चौक, डीबी रोड, थाना चौक व गंगजला चौक सहित कमोबेश प्रत्येक सड़क पर कुहासे के बीच रिक्शे वाले की ट्रिन ट्रिन हो रही थी व चार पहिया वाहनों का डीपर जल रहा था. हालांकि शहर में न तो कहीं अलाव की व्यवस्था व न ही कहीं पुलिस नजर आ रही थी. ये अलाव कब जलेगी साहबशीतलहर अपने तेवर में आ चुका है. महज चार दिनों के अंदर ही लोगों को ठंड से परेशानी होने लगी है. घरों व मकानों में रहने वाले लोगों को ठिठुरन भरी रात को गुजारने में संसाधनों का सहारा मिल जाता है, लेकिन सड़क किनारे रहने वाले लोगों के लिए ठंड की रात हो या जेठ की दुपहरी, कहर बन कर ही आती है. ठंड से परेशान लोगों ने बताया कि मौसम को देखते हुए प्रशासन हमेशा अलाव जलाने में पीछे रह जाता है, जबकि गरीब तबके के लोगों को कम गर्म कपड़ों के बीच अलाव जलने का इंतजार रहता है. अभी कोई आता-जाता नहींशहर के दक्षिणी छोर पर स्थित चांदनी चौक भाया रेडलाइट एरिया सुलिंदाबाद का रास्ता 12 बजे के बाद पूर्ण रूप से सुनसान हो चुका था. चांदनी चौक पर कुछ रिक्शा चालक घर जा रहे थे. वहीं आमतौर पर हमेशा गुलजार रहने वाले रेडलाइट एरिया में सन्नाटा पसरा हुआ था. हालांकि कहीं-कहीं कुछ सेक्स वर्कर घरों के बाहर ग्राहकों का इंतजार करती दिखीं, जो कैमरा का फ्लैश चमकते ही अंदर भागने लगी. फोटो- ठंड 3 – स्टेशन के बाहर ठंड से राहत पाने की कोशिश में रिक्शा चालकफोटो- ठंड 4 – शंकर चौक पर सवारी का इंतजार कर रहा रिक्शा चालक ठंड से बचने की कोशिश मेंफोटो- ठंड 5 – बंगाली बाजार में चूल्हे के पास लगा बिस्तरफोटो- ठंड 6 – रैन बसेरा में चादर के सहारे ठंड भगाने की नाकाम कोशिश में लोगकोहरे का कहर, दिन में दिखने लगा रात का मंजरसहरसा नगररविवार को दिन ढलने के बाद भी बादल छाये रहे. बर्फ जैसी हवा वातावरण में सिहरन फैलाती रही. कनकनी बढ़ने से लोग घरों में दुबके रहे. कोहरे की वजह से दिन में ही रात का मंजर दिखा. दिन में वाहनों की लाइट चलती नजर आयी. हालांकि आम दिनों की अपेक्षा सड़क पर वाहनों का परिचालन कम दिखा. बस सेवा बुरी तरह प्रभावित रही. दोपहर बाद से ही बाजार और सड़कों पर वीरानगी छाने लगी. ठंड से बचने के लिए लोग जगह-जगह निजी प्रयास से अलाव की व्यवस्था कर ठंड को भगाने का प्रयास करते रहे. फोटो – ठंड 7 – सहरसा-बनगांव रोड पर सुबह सात बजे कोहरे से ऐसी थी स्थिति.
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कुहासे की चादर में लिपटा शहर, अलाव की आस में कांपता रहा जिगर
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