नाश्ते में ब्रेड पर भी हो सकती है आफत

Published at :26 Oct 2015 7:18 PM (IST)
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नाश्ते में ब्रेड पर भी हो सकती है आफत

नाश्ते में ब्रेड पर भी हो सकती है आफत एक नवंबर से हो सकता है महंगाप्रभात खास श्रुतिकांत /सहरसा सिटी दाल के बाद अब नाश्ते के ब्रेड भी थाली से गायब हो सकती है. ब्रेड पर भी महंगाई का असर जल्द ही दिखने वाला है. बिहार की ब्रेड कंपनियो ने ब्रेड की कीमत में 10 […]

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नाश्ते में ब्रेड पर भी हो सकती है आफत एक नवंबर से हो सकता है महंगाप्रभात खास श्रुतिकांत /सहरसा सिटी दाल के बाद अब नाश्ते के ब्रेड भी थाली से गायब हो सकती है. ब्रेड पर भी महंगाई का असर जल्द ही दिखने वाला है. बिहार की ब्रेड कंपनियो ने ब्रेड की कीमत में 10 से 12 प्रतिशत तक की बढोतरी करने का निर्णय लिया है. आगामी एक नवंबर से नयी दर लागू हो सकती है. ब्रेड निर्माता मयंक टेकरीवाल ने कहा कि मजदूरी के साथ-साथ माल भाड़ा बढने के कारण ब्रेड की कीमतो में इजाफा करना मजबूरी बन गयी है. इसके लिये पूरे बिहार के ब्रेड निर्माताओं की बैठक पटना में हो चुकी है. वही दुसरी और खाद्य सुरक्षा विभाग व स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से शहर से लेकर गांव तक के लोग बासी खाद्य पदार्थ खाने को मजबूर है. शहर में इन दिनों नयी-नयी कंपनियां बाजार में अपना साम्राज्य फैला रही है. ये कंपनियां ब्रेड, बिस्कुट, पानी सहित अन्य खाने-पीने वाली वस्तुओं को बाजार में बेच लगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है. बावजूद प्रशासन चैन की नींद ले रहा है. नहीं रहता है कोई रेट बाजार में अचानक अपनी पैठ बना चुकी इन कंपनियों के संचालक का हौसला इतना बुलंद है कि गांव की बात तो दूर शहर में बिना किसी झिझक के खाद्य सुरक्षा को ताक पर रख कर सामान बेच रही है. इन वस्तुओं के पैकेट पर बैच नंबर, मैनुफैक्चरिंग डेट, बेस्ट यूज, एक्सपायरी डेट लिखना भी मुनासिब नहीं समझती है. जबकि किसी भी खाने पीने के समान में मैनुफैक्चरिंग तिथि व एक्सपायरी तिथि लिखा जाना आवश्यक है. अन्यथा कंपनी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है.क्या है नियम शहर में इन दिनों ब्रेड बनाने वाली कंपनियों की बहार सी आ गयी है. नित्य रोज नई ब्रेड लोगों के हाथ पहुंच रहा है. ये कंपनियां लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ तो कर रही है. अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को राजस्व व वातावरण को प्रदूषित भी कर रही है. मिली जानकारी के अनुसार इस तरह की कंपनी चलाने वालों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2011 के अंतर्गत फूड सेफ्टी लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण लाइसेंस, उद्योग विभाग से लाइसेंस, ब्रांड नेम का निबंधन, माप-तौल विभाग से लाइसेंस व अन्य कागजात को पूर्ण करने की आवश्यकता है. वही क्वालिटी टेस्ट के लिए समय-समय पर सांइस्टिफीक लेबोरेट्री से सैंपल की जांच करवानी पड़ती है. बाजार में बना चुका है पैठअन्य कंपनियों की अपेक्षा सस्ती दर पर बाजार में निर्मित वस्तुएं उपलब्ध कराने के कारण ये कंपनियों बाजार में अपनी पैठ बना चुकी है. कई दुकानदारों ने बताया कि इन ब्रेड, बिस्कुट, पानी में मार्जिन ज्यादा है. जबकि पूरे नियम कानून का पालन करने वाली कंपनियों में यह मार्जिन कम है. मार्जिन अधिक होने के कारण हमलोगों को बेचने में भी सहूलियत होती है. दुकानदारों ने बताया कि लोकल कंपनियों बचा माल वापस कर लेती है. जबकि कुछ कंपनियां ऐसा नहीं करती है. वही जानकार बताते हैं कि ये कंपनियों खाद्य सुरक्षा वापस कर पुन: उसे दूसरे बाजार में बेच देता है.क्या कहते हैं चिकित्सक इस बाबत शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस तरह के खाद्य पदार्थ के सेवन से लोगों को आंत व लीवर में सूजन, अनपच की शिकायत, पेट में दर्द, कमजोरी, भूख की कमी, उल्टी हो सकती है. चिकित्सक डॉ सिंह ने कहा कि लोगों को मैनुफैक्चरिंग व एक्सपायरी तिथि देखकर ही खरीदना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके अलावे खुले में रखे खाद्य पदार्थ का उपयोग भी नहीं करना चाहिए

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