सफाई में फिसड्डी है बिक्रमगंज नगर

Published at :27 Apr 2017 4:07 AM (IST)
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सफाई में फिसड्डी है बिक्रमगंज नगर

गलियों और सड़कों पर फैल रहा है नाली का गंदा पानी बिक्रमगंज (कार्यालय) : स्थानीय शहर के सफाई के नाम पर प्रत्येक माह लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं, लेकिन शहरवासी गंदगी और सड़ांध के बीच जीवन व्यतीत करने को विवश है. जिला मुख्यालय की तरह नगर की योजनाओं की यदि जांच करायी जाये, तो […]

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गलियों और सड़कों पर फैल रहा है नाली का गंदा पानी

बिक्रमगंज (कार्यालय) : स्थानीय शहर के सफाई के नाम पर प्रत्येक माह लाखों रुपये खर्च किये जाते हैं, लेकिन शहरवासी गंदगी और सड़ांध के बीच जीवन व्यतीत करने को विवश है. जिला मुख्यालय की तरह नगर की योजनाओं की यदि जांच करायी जाये, तो यहां भी एक बहुत बड़े घोटाले का उजागर हो सकता है, जिसमें सफाई का सबसे ऊपर स्थान होगा. गौरतलब हो कि शहर की सफाई की जिम्मेवारी एक एनजीओ को दिया गया है.
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सफाई के नाम पर एनजीओ को प्रत्येक माह तीन लाख अस्सी हजार रुपये का भुगतान किया जाता है. सफाई की स्थिति पर गौर किया जाये, तो शहर में केवल तेंदुनी चौक और सासाराम रोड में सब्जी बाजार तक की सफाई करायी जाती है. यानी कुल मिला कर सौ से दो सौ मीटर वह भी केवल झाड़ू लगाने का काम किया जाता है. नगरवासियों के अनुसार किसी भी मुहल्ले और सार्वजनिक स्थलों की कभी भी सफाई नहीं करायी जाती है. बताया जाता है कि जिस मुहल्ले में वार्ड पार्षद रहते हैं उस मुहल्ले में कभी-कभी सफाईकर्मी दिखाई देते हैं. परिणाम यह है कि शहर का सभी मुख्य नाला इस गरमी के मौसम में भी जाम है. नाले का पानी गलियों में पसर रहा है. लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक शिकायत नगर पंचायत से की गयी, लेकिन कोई सुननेवाला नहीं है. गरमी के मौसम में स्थिति यह है तो बारिश के मौसम में तो पूरा नगर नरक बन जायेगा. इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है. इस संबंध में अस्कामिनी नगर निवासी अधिवक्ता रविरंजन उर्फ मुन्ना यादव का कहना है कि उनके मुहल्ले से गुजरनेवाला नाला गत कई माह से जाम है. कई बार नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश राम से शिकायत की गयी, लेकिन कोई सुननेवाला नहीं है.
उसी वार्ड 13 के मुन्ना यादव का कहना है कि नगर में सफाई की राशि की बंदरबांट की जाती हैं. शहर की सफाई की वर्तमान में जो स्थिति है, उसकी जांच करायी जाये तो उसमें प्रत्येक माह दो लाख रुपये का भी खर्च नहीं आयेगा, लेकिन सफाई के नाम पर प्रत्येक माह तीन लाख अस्सी हजार रुपये की निकासी की जाती है. अधिवक्ता नरेंद्र सिंह का कहना है कि बिक्रमगंज नगर पंचायत की योजनाओं की जांच करायी जाये, तो यहां सासाराम से भी बड़े घोटाले का परदाफाश हो सकता है.
एनजीओ को हटाया जायेगा
सफाई की जिम्मेवारी जिस एनजीओ को दी गयी है. उसके कार्यों की शिकायत सभी जगह से आ रही है. उसे हटाया जायेगा.
सुरेश राम, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत
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