दलालों का दबदबा, जमीन का भाव सातवें आसमान पर
Updated at : 21 Nov 2019 8:30 AM (IST)
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चेनारी : रोटी, कपड़ा और मकान यह तीनों आम हो या खास सभी के लिए जरूरी है. नौकरी, व्यवसाय, खेती-बाड़ी कर सभी लोग जो कमाते हैं, उसमें कुछ राशि बचा कर अपने लिए कुछ जमीन खरीदने की सोच जरूर रखते हैं. सभी लोगों का यह सपना होता है कि उनका एक अच्छा अपना मकान प्रखंड […]
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चेनारी : रोटी, कपड़ा और मकान यह तीनों आम हो या खास सभी के लिए जरूरी है. नौकरी, व्यवसाय, खेती-बाड़ी कर सभी लोग जो कमाते हैं, उसमें कुछ राशि बचा कर अपने लिए कुछ जमीन खरीदने की सोच जरूर रखते हैं. सभी लोगों का यह सपना होता है कि उनका एक अच्छा अपना मकान प्रखंड मुख्यालय स्थित चेनारी में हो.
लेकिन, चेनारी में आमलोगों का यह सपना अब पूरा होना मुश्किल हो गया है. क्योंकि, चेनारी, तेलारी, खुरमाबाद में दलालों की संख्या इतनी बढ़ गयी है कि मानो जमीन का संपूर्ण स्वामित्व दलालों के हाथों में ही हो. ग्राहक खोजने से लेकर जमीन दिखाने व रजिस्ट्री विभाग में पहुंच कर जमीन रजिस्ट्री कराने तक का कार्य दलाल कर रहे हैं.
जमीन की खरीद-बिक्री के व्यवसाय में दलालों के बीच में पड़ने से जमीन का भाव सातवें आसमान पर है. जिस जमीन की कीमत दो-तीन लाख रुपये प्रति डिसमिल होनी चाहिए, उस जमीन का दाम सीधे दोगुना यानी छह लाख रुपये डिसमिल बताया जा रहा है. ऐसे में एक साधारण व्यक्ति के लिए जमीन खरीदना कैसे संभव होगा, यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
चेनारी की ही बात की जाये तो मुख्य जगहों को छोड़ जो अभी कृषि क्षेत्र है, वहां की जमीन भी दलालों ने ऐसी निर्धारित कर दी है कि सुन कर ही लोग आश्चर्य जता रहे हैं. जिस जमीन पर धान की फसल अभी लगी है, उस जमीन की कीमत पांच से छह लाख रुपये प्रति डिसमिल बतायी जा रही है.
ग्राहकों को तरह-तरह की बातों की जानकारी देकर दलाल ऐसा भ्रमित कर रहे हैं कि लोग भी उनके चंगुल में फंस जा रहे हैं. इसमें कई मामले तो ऐसे सामने आये हैं कि एक ही जमीन को दलाल दो-तीन लोगों को बिक्री कर दिये, जिसका नतीजा है कि थाना व कचहरी में वादों की संख्या भी बढ़ रही है.
ग्राहकों को सही जानकारी नहीं देते दलाल
जमीन की खरीद-बिक्री में सरकार की नयी नीति लागू होने के बाद दलाल और झूठ का सहारा लेने लगे हैं. जमीन में यदि किसी तरह का विवाद है, तो उसका जिक्र तक दलाल नहीं कर रहे. दलालों का मुख्य उद्देश्य है कि किसी तरह की जमीन बिक जाये और मोटी रकम उनकी जेब में आ जाये.
चाहे ग्राहक को जमीन लेने के बाद कोई फजीहत हो, उससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है. वहीं इस मामले में प्रशासन भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर सकी है. जबकि, प्रशासनिक कार्यालयों में ही जमीन विवाद के मामले पहुंच रहे हैं.
फिर भी प्रशासन कोई पहल नहीं कर पा रहा. जब कोई मारपीट या विवाद होता है, तो प्रशासनिक पदाधिकारी कार्रवाई करना शुरू करते हैं. आमलोगों का कहना है कि यदि दलालों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब आमलोगों के लिए शहर में रहने का सपना कभी पूरा नहीं होगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
जमीन की दलाली करनेवालों के विरुद्ध तभी कार्रवाई हो सकती है, जब लोग इसकी शिकायत करें. अभी तक किसी ने किसी तरह की शिकायत नहीं की है. शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी. रवींद्र कुमार, सीओ, चेनारी
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