दिल्ली में पूर्णिया का बढ़ा मान: 1965 युद्ध के महानायक शहीद अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर सिविल सोसायटी अध्यक्ष अरविंद सिंह सम्मानित

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सम्मानित होते हुए अध्यक्ष अरविंद सिंह | Prabhat Khabar Network

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1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर शहीद अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर नई दिल्ली में पूर्णिया सिविल सोसायटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह को सम्मानित किया गया. यह सम्मान सीमांचल और पूर्णिया के लिए गर्व का पल है. अरविंद सिंह ने इसे पूरे जिले के लिए गौरव बताया.

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1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के अमर नायक और देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान 'परमवीर चक्र' से अलंकृत वीर शहीद अब्दुल हमीद के शहादत दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय गरिमामयी समारोह में पूर्णिया सिविल सोसायटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया गया है.

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इस राष्ट्रीय मंच पर सीमांचल और पूर्णिया की सामाजिक भागीदारी को मिली इस विशिष्ट पहचान से जिले भर के प्रबुद्धजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में हर्ष की लहर है.

पूर्व उप सेना प्रमुख व दिग्गज हस्तियों के हाथों मिला सम्मान

नई दिल्ली में आयोजित इस भव्य शहादत सम्मान समारोह में देश की कई जानी-मानी शख्सियतें और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे.

मंच पर भारतीय सेना के पूर्व उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) लेफ्टिनेंट जनरल ए.एस. लांबा, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता रईस खान, को-प्रोड्यूसर हेमंत कुमार बारिक तथा चर्चित फिल्म 'मेंही' के निर्देशक दीपक शाह सहित कई प्रबुद्ध नागरिकों ने अरविंद कुमार सिंह को उनके सामाजिक कार्यों और राष्ट्रप्रेम के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया.

शहीद हमीद के चरणों में पुष्पांजलि, अरविंद सिंह बोले- पूरे पूर्णिया के लिए गर्व का क्षण

सम्मान प्राप्त करने के पश्चात पूर्णिया सिविल सोसायटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद के तैलचित्र पर भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया.

उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अमर बलिदानी अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर यह सम्मान प्राप्त होना उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समूचे पूर्णिया जिले के लिए अत्यंत गर्व और गौरव की बात है.

अब्दुल हमीद का सर्वोच्च बलिदान अजर-अमर: अरविंद कुमार सिंह

शहीद अब्दुल हमीद के अदम्य पराक्रम और शौर्य गाथा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 1965 के युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन के पैटन टैंकों को नेस्तनाबूद करने वाले अब्दुल हमीद का योगदान भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है.

उनका जीवन केवल एक सैनिक की वीरता की कहानी नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा, सर्वोच्च त्याग और अमर समर्पण की एक मिसाल है. उन्होंने दोहराया कि पूर्णिया सिविल सोसायटी देश के वीर जवानों, अमर सेनानियों और राष्ट्र नायकों के त्याग व आदर्शों को युवा पीढ़ी और जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर संकल्पित होकर काम करती रहेगी.

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