VIDEO: आरक्षण विवाद पर विजय सिन्हा का बयान, बोले- जाति के जहर में बंटा देश गुलाम हो गया; सनातन को लेकर भी कही यह बात

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बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जाति की राजनीति पर तीखे सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि देश जाति के जाल में बंटकर गुलाम हुआ और आजादी के इतने साल बाद भी राजनीति इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है. उन्होंने सनातन और इस्लाम पर भी टिप्पणी की.

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 Vijay sinha Reservation Controversy : बिहार में आरक्षण को लेकर जारी सियासी बहस के बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए विजय सिन्हा ने जाति की राजनीति पर सवाल उठाए और कहा कि जाति के जाल में बंटा देश गुलाम हो गया. उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी राजनीति बार-बार जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूम रही है.

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'पूछना चाहिए, आपने अपने समाज के लिए क्या किया'

विजय सिन्हा ने कहा कि हर नेता को यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि उसने अपने समाज के लिए क्या समर्पण किया और अपने राज्य के लिए ऐसी कौन-सी उपलब्धि हासिल की, जिससे राज्य उस पर गौरवान्वित हो. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति केवल एक समाज के लोगों के समर्थन से नेता नहीं बनता, बल्कि हर समाज के लोगों के आशीर्वाद से आगे बढ़ता है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका सम्मान और सबका गौरव' की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि विकास और समृद्धि के साथ बेरोजगारों को रोजगार, गरीबों का उत्थान और किसानों का कल्याण राजनीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए.

'जाति के नाम पर राजनीति से आगे बढ़ने की जरूरत'

विजय सिन्हा ने कहा कि देश और समाज को जातीय खांचे में बांटने के बजाय सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने सभी को आगे बढ़ने का अवसर देने की व्यवस्था की है. ऐसे में लंबे समय बाद भी राजनीति को केवल जातीय पहचान तक सीमित रखना उचित नहीं है.

इस्लाम और सनातन को लेकर भी दिया बयान

वहीं, एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए विजय सिन्हा ने इस्लाम और सनातन को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोग इस्लाम के मुद्दे पर बोलने से डरते हैं, जबकि सनातन पर टिप्पणी करना आसान समझते हैं. उन्होंने इसे मानसिकता से जोड़ते हुए कहा कि सनातन की उदारता पर बार-बार चोट की जाती है.

'सनातन को बांटने वाली मानसिकता राष्ट्रहित में नहीं'

विजय सिन्हा ने कहा कि सनातन के नाम पर समाज को बांटने और सामाजिक समरसता को खत्म करने वाली मानसिकता राष्ट्रहित में नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी सोच देश को कमजोर करती है और लोगों के बीच विभाजन पैदा करती है.

उन्होंने कहा कि सनातन के अनुयायियों को आपस में लड़ाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक, समाज में जहर फैलाने और सामाजिक समरसता खत्म करने वाली राजनीति से देश को नुकसान होता है.

'सबका सम्मान हो, सब आगे बढ़ें'

विजय सिन्हा ने अपने बयान में विकास और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ग को सम्मान मिलना चाहिए और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने जाति आधारित राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के विकास के लिए काम करने की अपील की.

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