आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में क्यों भड़के कर्मचारी? VC पवन सिन्हा के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन, जानें वजह
प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन करते स्टॉफ
Aryabhatta Knowledge University Staff Protest : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में कर्मचारियों ने जांच समिति की प्रक्रिया पर भारी नाराजगी जताई है. जांच के दौरान कथित अमर्यादित व्यवहार और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के आरोपों पर कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और जांच समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा का पुतला दहन किया.
Aryabhatta Knowledge University Staff Protest : आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में गठित जांच समिति की प्रक्रिया, अधिकार क्षेत्र और जांच के दौरान कथित अमर्यादित व्यवहार को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया. कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए जांच समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा का पुतला दहन किया. इस दौरान कर्मचारियों ने ‘पवन कुमार सिन्हा इस्तीफा दो’ और ‘विश्वविद्यालय की गरिमा से खिलवाड़ बंद करो’ जैसे नारे लगाए.

जांच समिति के गठन और प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कर्मचारियों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय, बिहार की ओर से पत्रांक A.K.U.-08/2026-1596/रा.स.-(1), दिनांक 27 जुलाई 2026 के माध्यम से जांच समिति का गठन किया गया था. इसमें उच्च शिक्षा विभाग, बिहार के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा को समिति का समन्वयक बनाया गया था. कर्मचारियों का दावा है कि पत्र में जांच के लिए 15 दिनों की अवधि निर्धारित की गई थी, लेकिन 12 सितंबर 2026 को समिति विश्वविद्यालय परिसर में जांच के लिए पहुंची.
जांच की अवधि बढ़ाने को लेकर भी कर्मचारियों की आपत्ति
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि निर्धारित 15 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद जांच के लिए समिति के विश्वविद्यालय पहुंचने से कई सवाल खड़े हुए हैं. उनका दावा है कि जांच की अवधि बढ़ाए जाने से संबंधित कोई आधिकारिक पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ था. इसी आधार पर कर्मचारियों ने जांच प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता की समीक्षा की मांग की है.

जांच के दायरे से अलग दस्तावेज मांगने का आरोप
कर्मचारियों ने जांच समिति के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि निर्धारित जांच विषय से अलग कई फाइलों और दस्तावेजों की मांग की गई, जिससे विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बना. विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच से संबंधित 1,344 पृष्ठों के अनुलग्नक पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके थे. इसके बावजूद अतिरिक्त फाइलों की मांग को लेकर कर्मचारियों ने जांच की सीमा पर सवाल उठाया.
समन्वयक पर कथित अमर्यादित व्यवहार का आरोप
कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, 12 सितंबर को जांच के दौरान समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा ने कुलपति और विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया. कर्मचारियों ने बातचीत के दौरान कथित धमकीपूर्ण लहजे में बात किए जाने का भी आरोप लगाया है.
कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप, स्वतंत्र पुष्टि नहीं
प्रेस विज्ञप्ति में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों को डंडे से मारकर हाथ-पैर तुड़वाने जैसी बातें कही गईं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में इन दावों को कर्मचारियों के आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है.
विश्वविद्यालय की गरिमा और सम्मान का मुद्दा उठाया
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि जांच किसी भी संस्था की प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन जांच के दौरान कुलपति, पदाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. कर्मचारियों ने कहा कि जांच समिति के समन्वयक से भी प्रशासनिक शिष्टाचार और पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है.
पुतला दहन कर जताया विरोध
इन्हीं मुद्दों को लेकर सोमवार को कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया. कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, गरिमा और सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि जांच के नाम पर दबाव, धमकी या कथित दुर्व्यवहार हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा.
इस्तीफे के साथ जांच समिति की समीक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पवन कुमार सिन्हा से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की. इसके साथ ही कर्मचारियों ने जांच समिति के गठन की प्रक्रिया, उसकी वैधानिकता, निर्धारित अवधि और अधिकार क्षेत्र की समीक्षा कराने की मांग उठाई.
कुलाधिपति से निष्पक्ष जांच की मांग
कर्मचारियों ने कुलाधिपति-सह-राज्यपाल, बिहार से पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की. उन्होंने जांच समिति के गठन और अधिकार क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा के साथ जांच के दौरान लगाए गए कथित अमर्यादित आचरण के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा. कर्मचारियों ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, प्रशासनिक गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
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