दानापुर में बिना सुरक्षा उपकरणों के नाले साफ कर रहे सफाईकर्मी, नगर परिषद की व्यवस्था पर सवाल
सफाई करते कर्मी
Danapur Sanitation Worker : पटना के दानापुर में सफाईकर्मी बिना जूते, दस्ताने और मास्क के गंदे नालों की सफाई कर रहे हैं. इस लापरवाही से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. नगर परिषद और आउटसोर्सिंग एजेंसी 'एडम' की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. देखें क्या है पूरा मामला.
Danapur Sanitation Worker : पटना के दानापुर नगर परिषद क्षेत्र के 40 वार्डों को स्वच्छ और साफ रखने के लिए दैनिक सफाई कर्मियों की तैनाती की गयी है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था के दौरान कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है. सफाई अभियान के दौरान कई सफाईकर्मी बिना जूते, दस्ताने, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों के गंदे नालों और सड़क किनारे जमा कचरे की सफाई करते नजर आये. इससे नगर परिषद और सफाई आउटसोर्सिंग एजेंसी 'एडम' की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
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एजेंसी पर उठे सवाल
बेली रोड संपर्क पथ के आसपास सफाई के दौरान भी सफाईकर्मियों के पास पर्याप्त सुरक्षा संसाधन नहीं दिखे. नाले के किनारे पड़े कचरे को कर्मी बिना दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों के हाथों से साफ करते नजर आये. सफाईकर्मियों के अनुसार, एजेंसी की ओर से उन्हें जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं कराये गये हैं.

नंगे पांव नाले की सफाई, संक्रमण का खतरा
सफाईकर्मियों को नंगे पांव और बिना दस्ताने के गंदे नालों की सफाई करते देख स्थानीय लोगों ने चिंता जतायी. लोगों का कहना है कि नालों में कांच के टुकड़े, सिरिंज और अन्य धारदार या खतरनाक सामान पड़े हो सकते हैं. ऐसे में बिना सुरक्षा उपकरणों के सफाई करना कर्मियों के लिए जोखिम भरा है.
सफाईकर्मियों के मुताबिक, बदबू और गंदगी से बचाव के लिए उन्हें नियमित रूप से मास्क, जूते और ग्लब्स जैसी मूलभूत सुरक्षा सामग्री नहीं मिल रही है. इससे उन्हें संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का डर बना रहता है.
चार साल से अधिक समय से सफाई व्यवस्था में लगे हैं कर्मी
नगर परिषद के दैनिक सफाई कर्मियों की तैनाती को चार साल से अधिक समय हो चुका है. इस दौरान सफाईकर्मी शहर की सड़कों, नालों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई का काम कर रहे हैं. बताया गया कि नगर परिषद क्षेत्र में करीब 900 दैनिक सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं.
सफाईकर्मियों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में सामान्य कपड़ों में ही काम करना पड़ता है. जो कपड़े पहनकर वे घर से निकलते हैं, उन्हीं कपड़ों में नगर की गंदगी साफ करने के बाद घर लौटते हैं. इससे गंदगी और संक्रमण के कण उनके घर तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है.
बेली रोड संपर्क पथ पर करीब 50 कर्मी कर रहे सफाई
बेली रोड संपर्क पथ समेत आसपास के इलाकों में करीब 50 दैनिक सफाई कर्मियों को सफाई कार्य में लगाया गया है. सफाई के दौरान कर्मियों के पास न तो पर्याप्त जूते थे और न ही हाथों में ग्लब्स. कई कर्मी बिना मास्क के भी काम करते नजर आये.
सफाईकर्मियों ने बताया कि सफाई आउटसोर्सिंग एजेंसी 'एडम' की ओर से उन्हें पर्याप्त संसाधन और दस्ताने उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. ऐसे में गंदे नालों और कचरे की सफाई करते समय उन्हें सीधे गंदगी के संपर्क में आना पड़ता है.
सफाई पर हर माह करीब सवा करोड़ रुपये खर्च
नगर परिषद की ओर से 40 वार्डों की साफ-सफाई व्यवस्था पर हर महीने करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किये जाने की बात कही गयी है. इसके बावजूद सफाईकर्मियों को मूलभूत सुरक्षा उपकरण नहीं मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल सड़कों और नालों की सफाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सफाई कर्मियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है. उनका कहना है कि जो कर्मचारी शहर को साफ रखने के लिए रोज गंदगी के बीच काम करते हैं, उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना नगर परिषद और संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है.
स्वच्छता पदाधिकारी ने मांगा एजेंसी से स्पष्टीकरण
मामले में नगर परिषद की स्वच्छता पदाधिकारी अपर्णा कुमारी ने बताया कि सफाई आउटसोर्सिंग एजेंसी 'एडम' को सफाईकर्मियों को ड्रेस के साथ जरूरी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
उन्होंने बताया कि इस मामले में सफाई आउटसोर्सिंग एजेंसी 'एडम' से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. सफाईकर्मियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए एजेंसी को निर्देशित किया गया है.
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