पटना : पेपरलेस हुई रजिस्ट्री तो घट गयी जमीन-मकान की खरीद-बिक्री, एक महीने में आधी रह गयी रजिस्ट्री, देखें आंकड़ा
पेपरलेस रजिस्ट्री (सांकेतिक तस्वीर)
Patna Paperless Registry : पटना में नई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन और मकानों के निबंधन में भारी गिरावट आई है. महज एक महीने में ही निबंधन की संख्या आधी होकर 800 रह गई है. लोगों को नई तकनीकी प्रक्रिया को समझने में दिक्कत आ रही है, जिससे खरीद-बिक्री पर असर पड़ा है.
Patna Paperless Registry : जमीन से लेकर मकान तक की रजिस्ट्री को पेपरलेस करने की व्यवस्था लागू होने के बाद पटना में दस्तावेजों के निबंधन की संख्या में बड़ी गिरावट आयी है. फॉर्म भरने और नई तकनीकी व्यवस्था की जानकारी के अभाव में खरीदने और बेचने वाले दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए यह परेशानी और अधिक है.
एक महीने में 1620 के बजाय हुई सिर्फ 800 रजिस्ट्री
पटना सदर निबंधन कार्यालय में 17 अगस्त से 17 सितंबर के बीच इस साल करीब 800 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी अवधि के दौरान 1620 दस्तावेजों का निबंधन हुआ था. यानी पिछले साल की तुलना में इस अवधि में रजिस्ट्री की संख्या करीब आधी रह गयी है.
17 अगस्त से शुरू हुई पेपरलेस व्यवस्था
रजिस्ट्री की पेपरलेस व्यवस्था 17 अगस्त 2026 से शुरू की गयी. इसके तहत रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम कर ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है. हालांकि, नयी व्यवस्था की तकनीकी जानकारी के अभाव में लोगों को फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेजों के निबंधन तक परेशानी हो रही है.
ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी
जमीन की खरीद-बिक्री के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग निबंधन कार्यालय पहुंचते हैं. फॉर्म भरने और ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण ऐसे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पहले दस्तावेज तैयार कराने और फॉर्म भरने में कातिबों की मदद ली जाती थी.
कातिबों की हड़ताल से भी बढ़ी मुश्किल
पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में कातिबों की हड़ताल का असर भी रजिस्ट्री प्रक्रिया पर पड़ा है. कातिबों की मदद नहीं मिलने से खुद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ लोगों को अतिरिक्त परेशानी हो रही है. इससे निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों की संख्या प्रभावित हुई है.
शुरुआत के दो दिनों में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई
जानकारों के अनुसार 17 अगस्त को पेपरलेस व्यवस्था शुरू होने के बाद शुरुआती दो दिनों में पटना सदर निबंधन कार्यालय में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई. इसके बाद एक सप्ताह के दौरान करीब दो दर्जन दस्तावेजों का निबंधन हुआ. इनमें वैसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से पहले ही रजिस्ट्री के लिए स्लॉट ले रखा था.
रोजाना औसतन 28 दस्तावेजों की हो रही रजिस्ट्री
वर्तमान में पेपरलेस व्यवस्था के तहत पटना सदर निबंधन कार्यालय में रोजाना औसतन 28 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो रही है. इसके मुकाबले व्यवस्था लागू होने से पहले सामान्य दिनों में रोजाना 60 से 80 दस्तावेजों का निबंधन होता था. शादी-ब्याह के मौसम में रजिस्ट्री की संख्या 100 से भी अधिक पहुंच जाती थी.
रजिस्ट्री घटने से राजस्व पर भी असर
दस्तावेजों की रजिस्ट्री की संख्या कम होने का असर सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ रहा है. जमीन और मकान के निबंधन से सरकार को स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होता है. रजिस्ट्री की संख्या में कमी आने से इस मद में राजस्व संग्रह प्रभावित होने की बात सामने आ रही है.
तकनीकी जानकारी की कमी बन रही बड़ी चुनौती
जानकारों के अनुसार पेपरलेस व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की संख्या में कमी का एक प्रमुख कारण नयी तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी का अभाव है. खासकर ऐसे लोग जो ऑनलाइन फॉर्म और डिजिटल प्रक्रिया से परिचित नहीं हैं, उन्हें रजिस्ट्री कराने में अधिक परेशानी हो रही है.
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