कोर्ट रूम में एक साथ पहुंचे 20 वकील, जज ने दिया बाहर जाने का आदेश, जानें पूरा मामला
हाई कोर्ट में मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश के न्याय कक्ष में उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब मुख्य न्यायाधीश ने अपने न्याय कक्ष में उपस्थित सभी वकीलों को अपने न्याय कक्ष से बाहर निकल जाने को कह दिया. जिस समय यह वाक्या हुआ उस समय कोर्ट में उपस्थित सभी वकील अपने मामले की सुनवाई में शामिल होने कोर्ट रूम में उपस्थित थे. इन लोगों को कोर्ट रूम में जाने के लिये हाई कोर्ट प्रशासन ने ई पास जारी किया था.
हाई कोर्ट में मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश के न्याय कक्ष में उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब मुख्य न्यायाधीश ने अपने न्याय कक्ष में उपस्थित सभी वकीलों को अपने न्याय कक्ष से बाहर निकल जाने को कह दिया. जिस समय यह वाक्या हुआ उस समय कोर्ट में उपस्थित सभी वकील अपने मामले की सुनवाई में शामिल होने कोर्ट रूम में उपस्थित थे. इन लोगों को कोर्ट रूम में जाने के लिये हाई कोर्ट प्रशासन ने ई पास जारी किया था.
हुआ यूं कि मुख्य न्यायाधीश के न्याय कक्ष में क्रम संख्या 16 जो लोकहित याचिका थी उसे सुनवाई के लिये जब पुकारा गया तो उस समय एक साथ करीब 20 से ज्यादा वकील सुनवाई के लिये मुख्य न्यायाधीश के सामने उपस्थित हो गए. यह मामला सूबे के सिपाही भर्ती से जुड़ा था. हाई कोर्ट की दैनिक कार्य सूची में उक्त मामले में कारीब दो दर्जन से अधिक वकीलों को नाम लिस्टेड था.लाजिमी है लिस्ट में नाम प्रकाशित होने पर सभी वकीलों को कोर्ट में प्रवेश के लीए ई-पास मिला था उससे वे कोर्ट में प्रवेश किये. ऐसी स्थिति में मुख्य न्यायाधीश ने चिंतित स्वर में कहा कि लगता है पीआईएल मामलों को फिजिकल सुनवाई के लिए लिस्टिंग कर उन्होंने गलती कर दी है.
खण्डपीठ ने उक्त पीआईएल के साथ अपने यहां सूचीबद्ध सभी मामलों पर सुनवाई नहीं की. मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक तौर पर कहा अब से कुछ मामलों को छोड़ अधिकतर पीआईएल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर ही सुना जाएगा. उन्होंने इसको लेकर कोर्ट मास्टर को ज़रूरी निर्देश भी दिए.
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वहीं वकीलों ने कोर्ट से बाहर जाकर अपनी मायूसी जताते हुए कहा कि जब यह सब मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो रहा था और उसमे बड़ी तादाद में वकीलों के नाम प्रकाशत हुए उसी वक्त यह तय कर लेना चाहिए था कि मामला फिजिकल कोर्ट के लायक है या नही . अगर यह पहले तय कर लिया गया होता तो वकीलों को इतनी फजीहत नही झेलनी होती .मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में कहा कि यह कदम उन्होंने कोरोना संक्रमण के मद्दे नजर उठाया .
Posted By :Thakur Shaktilochan
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