पटना में AI से बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, जाम से 40 मिनट पहले मिलेगा अलर्ट, मिनटों में अस्पताल पहुंचेगी एंम्बुलेंस
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Patna AI Traffic Control : राजधानी पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इस नई प्रणाली से जाम की भविष्यवाणी 30-40 मिनट पहले की जा सकेगी, जिससे ट्रैफिक सिग्नल और डायवर्जन स्वचालित रूप से समायोजित हो सकेंगे.
Patna AI Traffic Control : राजधानी पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गयी है. प्रस्तावित सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से जाम का 30 से 40 मिनट पहले अनुमान लगाने की योजना है. इसके आधार पर ट्रैफिक सिग्नल और डायवर्जन को स्वतः बदला जा सकेगा. इसका एक अहम लक्ष्य आपात स्थिति में एंबुलेंस को तेजी से रास्ता उपलब्ध कराना है, ताकि उसे करीब 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा सके.
पटना में AI आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम पर बनी रणनीति
पटना में यातायात की बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान को लेकर शनिवार को पथ निर्माण विभाग के सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का विषय यातायात के प्रबंधन और समाधान पर केंद्रित था. इसमें राजधानी समेत राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई.
30-40 मिनट पहले पता चलेगा कहां लग सकता है जाम
कार्यक्रम में AI संचालित कमांड मॉडल लागू करने का प्रस्ताव रखा गया. इसके तहत उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित जाम का 30 से 40 मिनट पहले अनुमान लगाने की व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा हुई. अनुमान के आधार पर संबंधित इलाकों के ट्रैफिक सिग्नल और डायवर्जन को स्वचालित तरीके से समायोजित किया जा सकेगा.
एंबुलेंस को 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य
नई यातायात व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य आपातकालीन वाहनों के आवागमन को बेहतर बनाना है. प्रस्तावित सिस्टम के जरिए एंबुलेंस के लिए ट्रैफिक को तेजी से मैनेज करने और रास्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में ऐसी व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया, जिससे एंबुलेंस करीब 10 मिनट में अस्पताल तक पहुंच सके.
इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जुड़ेगा AI सिस्टम
पटना के मौजूदा एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर के बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया. इसके ऊपर एक इंटेलिजेंस लेयर विकसित करने की बात कही गयी. इससे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण कर यातायात व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है.
बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव पर भी मंथन
कार्यक्रम में आंकड़ों के आधार पर पटना शहर की भौगोलिक संरचना, बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव पर चर्चा की गयी. इसके साथ ही अतिक्रमण, ट्रैफिक नियमों के पालन और मौजूदा यातायात प्रबंधन की चुनौतियों को भी समाधान का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया.
आर्केडिस ने तैयार किया तकनीकी ड्राफ्ट
पटना के ट्रैफिक मैनेजमेंट और समाधान को लेकर प्रो. पीके सिकदर और वेंकटा चुंदुरू ने आर्केडिस की ओर से तैयार तकनीकी ड्राफ्ट का प्रस्तुतीकरण किया. इसमें मौजूदा ट्रैफिक सिस्टम को तकनीक से मजबूत करने और डेटा आधारित निर्णय लेने की व्यवस्था विकसित करने से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे.
कार्यक्रम में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने की. मुख्य वक्ताओं में सीआरआरआइ के पूर्व निदेशक और आइआइटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर पीके सिकदर तथा आर्केडिस आइबीआइ ग्रुप के इंडिया ऑपरेशंस के कंट्री हेड वेंकटा चुंदुरू शामिल रहे. कार्यक्रम में बीएसआरडीसीएल के प्रबंध निदेशक, पटना नगर आयुक्त, यातायात पुलिस अधीक्षक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे.
राज्य के दूसरे शहरों में भी लागू करने पर जोर
चर्चा केवल पटना तक सीमित नहीं रही. राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार किया गया. तकनीक आधारित मॉडल को जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दूसरे शहरों में भी उपयोगी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई.
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