पटना के सरकारी स्कूलों में परीक्षा की तारीख तय, पर सिलेबस 30% भी पूरा नहीं, जानिए कब से है एग्जाम
परीक्षा की सांकेतिक तस्वीर
Bihar Class 11 Quarterly Examination : बिहार के प्लस टू स्कूलों में 11वीं की त्रैमासिक परीक्षा 18 सितंबर से शुरू हो रही है, जबकि कई स्कूलों में अभी तक 30% सिलेबस भी पूरा नहीं हुआ है. 50% से अधिक छात्रों की उपस्थिति 20 दिनों से भी कम है, जिससे पढ़ाई की निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं.
Bihar Class 11 Quarterly Examination : पटना समेत राज्य के प्लस टू स्कूलों और इंटर कॉलेजों में 11वीं की पढ़ाई शुरू हुए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है. इसके बावजूद 18 सितंबर से त्रैमासिक परीक्षा आयोजित की जाएगी. स्थिति यह है कि कई स्कूलों में अब तक सिर्फ 25 से 35 दिन ही कक्षाएं चल पायी हैं. वहीं 11वीं में नामांकित 50 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति 20 दिन भी पूरी नहीं हुई है.
30 फीसदी सिलेबस भी नहीं हुआ पूरा
त्रैमासिक परीक्षा की तैयारी को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती है. स्कूलों में पहली त्रैमासिक परीक्षा के लिए निर्धारित सिलेबस का 30 फीसदी हिस्सा भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है. ऐसे में कम कक्षा और अधूरे सिलेबस के बीच विद्यार्थियों को परीक्षा देनी होगी.
नामांकन प्रक्रिया के बीच बाधित रही पढ़ाई
जुलाई में इंटर में नामांकन की प्रक्रिया चलती रही. इसके बाद ऑनस्पॉट नामांकन के तहत 11 अगस्त तक प्लस टू स्कूलों और इंटर कॉलेजों में दाखिले लिये जाते रहे. नामांकन के बीच कुछ कक्षाएं जरूर हुईं, लेकिन नियमित रूप से पढ़ाई नहीं हो सकी. इसका सीधा असर विद्यार्थियों की उपस्थिति और सिलेबस पूरा होने की रफ्तार पर पड़ा.
50 फीसदी छात्रों की उपस्थिति 20 दिन से कम
स्कूलों में दर्ज उपस्थिति के आंकड़े बताते हैं कि 11वीं में नामांकित 50 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों की अब तक 20 दिन भी उपस्थिति नहीं बनी है. शिक्षकों के अनुसार साइंस और कॉमर्स संकाय में विद्यार्थियों की उपस्थिति सबसे कम रही है. इससे इन कक्षाओं में नियमित पढ़ाई कराना भी चुनौती बना हुआ है.
कई विषयों की एक दिन भी नहीं हुई कक्षा
शहर के कई प्लस टू स्कूलों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र बनाये जाते हैं. परीक्षा केंद्र बनने के कारण भी नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं. शिक्षकों के अनुसार 11वीं के कई विषय ऐसे हैं, जिनकी अब तक एक दिन भी कक्षा नहीं हुई है. कुछ विषयों में पढ़ाई की शुरुआत तक नहीं हो पायी है.
ग्रामीण स्कूलों में जगह की भी समस्या
ग्रामीण क्षेत्र के कई स्कूलों के विद्यार्थियों ने बताया कि कक्षा में बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं है. ऐसे में सभी विद्यार्थियों के लिए हर दिन कक्षा में बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. कम जगह और सीमित कक्षा संचालन का असर पढ़ाई की निरंतरता पर पड़ रहा है.
कम समय में परीक्षा की तैयारी बनी चुनौती
विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक ओर नियमित कक्षाएं नहीं हो पायी हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा की तारीख तय है. शिक्षकों का कहना है कि कम समय में निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करना और विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा.
आंकड़ों से समझें 11वीं की स्थिति
- त्रैमासिक परीक्षा: 18 सितंबर से
- कक्षा संचालन: 25 से 35 दिन
- 50 फीसदी से अधिक छात्रों की उपस्थिति: 20 दिन से कम
- पूरा सिलेबस: 30 फीसदी से भी कम
- सबसे कम उपस्थिति: साइंस और कॉमर्स
- कई विषयों में कक्षा: एक दिन भी नहीं
- नामांकन प्रक्रिया: 11 अगस्त तक ऑनस्पॉट दाखिला
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