विदेशी इंप्लांट की सप्लाई में देरी से नहीं रुकेगा इलाज, आयुष्मान मरीजों को अब मेड इन इंडिया का सहारा
एआइ से बनायी गयी तस्वीर
आयुष्मान योजना के मरीजों को अब विदेशी इंप्लांट की अनुपलब्धता के कारण सर्जरी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग ने मेड इन इंडिया इंप्लांट को प्राथमिकता देने का निर्देश जारी किया है।
Ayushman Card : आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को अब विदेशी इंप्लांट की उपलब्धता नहीं होने के कारण सर्जरी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. मरीजों को समय पर सर्जरी और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अब मेड इन इंडिया इंप्लांट को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किये गये हैं. स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के बाद राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों को इस संबंध में दिशा-निर्देश भेजे जा रहे हैं.
जानकारों के अनुसार, विदेशों से इंप्लांट की सप्लाई में देरी के कारण मरीजों को कई बार सर्जरी के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था. मरीजों की परेशानी को देखते हुए अब मेड इन इंडिया इंप्लांट के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू की जा रही है.
विशेष परिस्थिति में ही विदेशी इंप्लांट
आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, किसी मरीज के इलाज में विदेशी इंप्लांट की विशेष जरूरत होने पर संबंधित डॉक्टर को पहले लिखित अनुमति लेनी होगी. सक्षम स्तर से अनुमति मिलने के बाद ही विदेशी इंप्लांट लगाया जा सकेगा. बिना अनुमति विदेशी इंप्लांट लगाने पर इसे वित्तीय अनियमितता माना जा सकता है और संबंधित डॉक्टर की जिम्मेदारी तय की जा सकती है.
इंप्लांट की वजह से सर्जरी के लिए मिलती थी वेटिंग
पटना समेत पूरे बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में प्रतिदिन 1200 से 1500 से अधिक छोटे-बड़े ऑपरेशन किये जाते हैं. बड़ी संख्या में गरीब मरीज आयुष्मान, विपन्न और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत इलाज के लिए भर्ती होते हैं. अभी तक इन मरीजों के इलाज में मेड इन इंडिया और विदेशी दोनों तरह के इंप्लांट का इस्तेमाल किया जाता था.
सूत्रों के अनुसार, विदेशी इंप्लांट की सप्लाई में देरी के कारण कई मरीजों की सर्जरी प्रभावित होती थी. इसी को देखते हुए विदेशी इंप्लांट के विकल्प के तौर पर देश में निर्मित इंप्लांट का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने को कहा गया है. हालांकि, जिन मामलों में विदेशी इंप्लांट जरूरी होगा, उनमें अनुमति लेकर इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा.
घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण से स्टेंट तक में होता है इस्तेमाल
हड्डी रोग विभाग में घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण, कार्डियोलॉजी विभाग में स्टेंट तथा नेत्र रोग विभाग में विभिन्न प्रकार के इंप्लांट और उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, कुछ विशेष मरीजों के इलाज में विदेशी उत्पादों की आवश्यकता हो सकती है.
स्वास्थ्य प्रशासन के निर्देश के मुताबिक विदेशी इंप्लांट के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. विशेष जरूरत होने पर सक्षम स्तर से लिखित अनुमति लेकर विदेशी इंप्लांट लगाया जा सकेगा. इससे मरीज की सर्जरी और इलाज को जरूरत के मुताबिक जारी रखने का रास्ता खुला रहेगा.
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