ऐसे ही नियम तोड़ते रहे तो कैसे होगी सुरक्षा
Updated at : 12 Jan 2020 7:08 AM (IST)
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पटना : सड़क सुरक्षा सप्ताह शनिवार से शुरू हो गया. इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है और अगले छह दिनों तक कई कार्यक्रम होंगे. पिछले कई वर्षों से हर वर्ष सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ऐसे प्रयास किये जाते रहे हैं. लेकिन, आवागमन […]
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पटना : सड़क सुरक्षा सप्ताह शनिवार से शुरू हो गया. इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया गया है और अगले छह दिनों तक कई कार्यक्रम होंगे. पिछले कई वर्षों से हर वर्ष सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ऐसे प्रयास किये जाते रहे हैं. लेकिन, आवागमन और सड़क सुरक्षा पर इसका असर नहीं दिख रहा है. वाहन चालकों से लेकर पैदल सवार तक हर दिन ट्रैफिक नियमों को अंगूठा दिखा रहे हैं. सवाल है कि ऐसे में सड़क दुर्घटनाएं कैसे कम होंगी.
जारी है बसों और ऑटो रिक्शा की ओवरलोडिंग
बस और ऑटो रिक्शा के ओवर लोडिंग पर लगाम लगाने की जिला प्रशासन और यातायात पुलिस ने पिछले वर्ष अगस्त माह में घोषणा की थी. लेकिन, इसके लिए सख्तीपूर्वक अभियान नहीं चलाया गया. परिणाम है कि इसमें रत्ती भर की भी कमी नहीं आयी है. आज भी ड्राइविंग सीट पर तीन यात्रियों को बिठाये ऑटो रिक्शा और ओवरलोडेड बसें हर दिन ट्रैफिक पोस्ट के आगे से बेरोकटोक गुजरती हैं.
जारी है जेब्रा जंप : जेब्रा क्रॉसिंग के इस्तेमाल के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए कई विशेष अभियान चलाये गये. सिग्नल पर लगे हाइ रिजोल्यूशन कैमरे से निगरानी की जा रही है और हर दिन बड़ी संख्या में इ-चालान काटे जा रहे हैं. इसके बावजूद जेब्रा जंप जारी है.
पुलिस वाले भी दिखते हैं बिना हेलमेट के
बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों के खिलाफ पिछले दिनों लगातार अभियान चलाये गये हैं. बड़ी संख्या में लोगों से जुर्माना भी वसूला गया है. इसके बावजूद बिना हेलमेट के बाइक चलाने का चलन बंद नहीं हुआ है. आम लोग ही नहीं पुलिस वाले भी बिना हेलमेट के बाइक चलाते या उसके पीछे बैठे दिख जाते हैं.
धड़ल्ले से जारी है ट्रिपल लोडिंग
बाइक पर ट्रिपल लोडिंग बैन है और ऐसा करने पर एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है. इसके बावजूद लिंक रोड और गली ही नहीं शहर की प्रमुख सड़कों पर भी लोग ट्रिपल लोड वाहन चलाते दिख जाते हैं.
वहीं, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल पर बातचीत बेहद खतरनाक है. नये मोटर वाहन कानून में इसको रोकने के लिए पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है. इसके बावजूद बाइक या चारपहिया वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातचीत करने का चलन आम है.
शहर में हर दूसरे दिन सड़क दुर्घटना में एक मौत
पटना शहर में हर दूसरे दिन सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो रही है. वर्ष 2019 में शहर के तीन ट्रैफिक थानों गांधी मैदान, जीरो माइल और सगुना मोड़ में सड़क दुर्घटना के 460 मामले दर्ज हुए. इनमें 171 की मौत हो गयी जबकि 286 जख्मी हुए. पिछले दो वर्षों की तुलना में यह अधिक है.
वर्ष 2018 में 347 सड़क दुर्घटना में 139 लोगों की मौत हुई जबकि 2017 में 400 सड़क दुर्घटना में 132 लोगों की मौत हुई. 2018 की तुलना में 2019 में सड़क दुर्घटना की संख्या में 32% और मृतकों की संख्या में 23% का इजाफा हुआ है.
इसीतरह वर्ष 2017 की तुलना में सड़क दुर्घटना की संख्या में 15% और मृतकों की संख्या में 29% की वृद्धि हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि पटना के आसपास के क्षेत्रों में हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और उसमें होने वाली मौतों को यदि इन आंकड़ों में जोड़ दिया जाये, तो रोज मरनेवालों की संख्या तीन तक पहुंच जायेगी.
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