पटना : जन्मजात रोगों का मुफ्त इलाज कर रहा आइजीआइएमएस

Updated at : 07 Jan 2020 9:20 AM (IST)
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पटना : जन्मजात रोगों का मुफ्त इलाज कर रहा आइजीआइएमएस

साकिब कम खर्च में हो रही हैं जटिल सर्जरियां, मरीजों को बिहार से बाहर जाने की मजबूरी भी नहीं रही पटना : आइजीआइएमएस ने हाल के दिनों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. पिछले एक महीने में ही यहां कई ऐसे जटिल ऑपरेशन हुए हैं, जो अब तक बिहार में पहले नहीं हुए थे. […]

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साकिब
कम खर्च में हो रही हैं जटिल सर्जरियां, मरीजों को बिहार से बाहर जाने की मजबूरी भी नहीं रही
पटना : आइजीआइएमएस ने हाल के दिनों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. पिछले एक महीने में ही यहां कई ऐसे जटिल ऑपरेशन हुए हैं, जो अब तक बिहार में पहले नहीं हुए थे.
कई ऑपरेशन जो अब तक राज्य के चुनिंदा निजी अस्पतालों में होते थे, अब यहां भी होने लगे हैं. इसके चलते काफी महंगी मानी जाने वाली सर्जरी बिहार के मरीजों को कम खर्च में ही मिल रही है. साथ ही अब इसके लिए बिहार से बाहर जाने की मजबूरी भी नहीं रही. 16 वर्ष तक के बच्चों में अगर जन्मजात बीमारी है, तो उनके ऑपरेशन यहां नि:शुल्क होते हैं.
बच्चों की होने लगी दिल की सर्जरी : सूबे में जन्म से ही दिल में सुराख वाले बच्चों की संख्या अधिक है. ऐसे बच्चों के इलाज में लाखों रुपये का खर्च आता है. आइजीआइएमएस में पिछले दिसंबर से इसके इलाज के लिए हार्ट सर्जरी होने लगी है. इससे पहले पटना में कुछ निजी अस्पतालों में भी यह सर्जरी 2 लाख होती थी. आइजीआइएमएस में अब बच्चों का यह ऑपरेशन बिल्कुल नि:शुल्क हो सकता है. इसके कार्डियक सर्जरी विभाग में पहली बार दिसंबर में दो बच्चियों की यह हार्ट सर्जरी हुई. डॉ शील अवनीश के नेतृत्व में डॉ तुषार कुमार, डॉ एजे झा, डॉ माधव सिंह और डॉ रुचि सिंह, डॉ आलोक भारती और डॉ शशांक की टीम ने यह सर्जरी की थी.
पहली बार हुई खाने की नली के कैंसर की खास सर्जरी, बची मरीज की जान
31 दिसंबर, 2019 को आइजीआइएमएस के डॉक्टरों ने थोरैकोस्कोपिक इसोफेजेक्टोमी (की-होल) सर्जरी कर 50 वर्षीय कैंसर मरीज की जान बचा ली. एंडोस्कोपी और बायोप्सी के बाद मरीज को पता चला कि उसे खाने की नली का कैंसर है. उसका ट्यूमर काफी बड़ा है.
कीमोथेरेपी के आठ राउंड देने के बाद इसका आकार कम हो गया, लेकिन कैंसर बना रहा. ऐसे में डॉक्टरों ने मरीज की थोरैकोस्कोपिक इसोफेजेक्टोमी विधि से कामयाब सर्जरी की. पहले इस तरह के मरीजों में ऑपरेशन करने के लिए छाती और पेट को चीरने की जरूरत होती थी. इसमें ऑपरेशन के बाद काफी दर्द और निमोनिया हो जाता था. जबकि इस नयी तकनीक से हुई सर्जरी में छोटे सुराख कर ही आॅपरेशन किया गया. परेशानी कम होती है.
पहली बार पूर्वी भारत में हुई बोन ब्रीज इंप्लांट सर्जरी: आइजीआइएमएस में तीन जनवरी को सात वर्षीय बच्चे के कान की जन्मजात बीमारी का ऑपरेशन इएनटी विभाग में किया गया. यह ऑपरेशन बोन ब्रीज इंप्लांट तकनीक से हुआ.
इसे करने वाले डॉक्टरों का दावा है कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में पहली बार यह सर्जरी हुई थी. इसके इएनटी विभाग ने हाल के वर्षों में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है. अब यहां वैसी कई सर्जरी हो रही है, जो कुछ समय पहले तक दिल्ली जैसे महानगरों में ही होती थी.
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