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सेहत पर भारी गोरखधंधा : महंगी दवा खपाने का बड़ा माध्यम बने हेल्थ इंश्योरेंस और आइसीयू

Updated at : 22 Oct 2019 8:19 AM (IST)
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सेहत पर भारी गोरखधंधा : महंगी दवा खपाने का बड़ा माध्यम बने हेल्थ इंश्योरेंस और आइसीयू

पटना : एक प्राइवेट कंपनी में बड़े पद पर काम कर रहे आरा के शिवनंदन भट्ट को पिछले दिनों बुखार लगने पर अपने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के राजाबाजार स्थित एक इमपैनल्ड अस्पताल में इलाज के लिए गये. जांच के बाद पता चला कि उन्हें डेंगू हो गया है. प्लेटलेट्स 30 हजार के पास आने के […]

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पटना : एक प्राइवेट कंपनी में बड़े पद पर काम कर रहे आरा के शिवनंदन भट्ट को पिछले दिनों बुखार लगने पर अपने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के राजाबाजार स्थित एक इमपैनल्ड अस्पताल में इलाज के लिए गये.
जांच के बाद पता चला कि उन्हें डेंगू हो गया है. प्लेटलेट्स 30 हजार के पास आने के बाद से उनसे महंगी से महंगी दवाएं मंगायी जाने लगीं. पांच दिन के बाद जब वे इलाज से छूटे, तो जानकारी मिली कि दस हजार से ज्यादा बिल तो केवल दवाओं का हुआ है.
एजी कॉलोनी के रहनेवाले अभिनंदन के दादाजी की जब तबीयत खराब हुई तो उन्होंने पाटलिपुत्र कॉलोनी के एक अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया. ऑक्सीजन की कमी की बात कहकर उनके दादाजी को आइसीयू में ले जाया गया. इस बीच उनसे पांच हजार रुपये की दवाएं मंगायी गयीं. अभिनंदन से पंद्रह हजार से ज्यादा की दवा और मरहम पट्टी आदि मंगवायी गयी. कुल बिल तो एक लाख रुपये से ज्यादा का रहा.
पटना : आम आदमी के स्वास्थ्य को लेकर स्वाभाविक चिंता कैसे प्राइवेट अस्पतालों के लिए महंगी दवाओं को खपाने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है. यह देखना हो तो स्वास्थ्य बीमा और आइसीयू पर गौर फरमा लीजिए. ये दो केस हर उस व्यक्ति के साथ आम है, जिसने स्वास्थ्य बीमा कराया है.
यदि आपके कोई स्वजन कभी आइसीयू में भर्ती हुए होंगे, उस वक्त भी यही कटु अनुभव आपको हुआ होगा. दवाओं के बाजार के जानकार बताते हैं कि अस्पतालों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस की स्कीम और आइसीयू एक दुधारू गाय बन चुकी है. प्राइवेट अस्पताल आइसीयू में महंगी से महंगी दवाएं मंगाते हैं और संख्या भी बहुत अधिक होती है. सिर्फ बात दवाओं तक सीमित नहीं है, अस्पताल में इलाज में इस्तेमाल होने वाली हर चीज जैसे सीरिंज, कैथेटर्स से लेकर बैंडेज और डायपर्स तक भारी डिस्काउंट पर खरीदते हैं और मरीजों को एमआरपी पर बेचते हैं. अस्पतालों का फायदा ही फायदा होता है.
रिपोर्ट जानने का अधिकार
पटना हाइकोर्ट के वकील शांतनु कुमार कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले अस्पताल मेडिकल क्लीनिक कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के अंदर आते हैं.
इसके अनुसार सभी मरीज को इलाज में होने वाले खर्च और मेडिकल रिपोर्ट्स और रिकॉर्ड्स की जानकारी का अधिकार है. इसके मुताबिक सभी मरीजों को जानकारी दी जानी चाहिए कि उनको क्या बीमारी है और इलाज का क्या नतीजा निकलेगा?
साथ ही मरीज को इलाज पर खर्च, उसके फायदे और नुकसान और इलाज के विकल्पों के बारे में बताया जाना चाहिए. यही नहीं किसी भी मरीज या फिर उसके मान्यता प्राप्त व्यक्ति को अधिकार है कि अस्पताल उसे केस से जुड़े सभी कागजात की फोटोकॉपी दें.
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