दो लाख डीएलएड डिग्रीधारी अनिश्चितता के भंवर में

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पटना : एनआइओएस के डीएलएड को अमान्य ठहराने के मामले में शिक्षा विभाग ने अपनी स्थिति अभी भी साफ नहीं की है. इससे प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन में अपात्र ठहराने की कवायद से प्रदेश के दो लाख से अधिक युवक-युवतियां अनिश्चितता के भंवर में फंस गये हैं. 18 सितंबर से पंचायतों में नियोजन की प्रक्रिया […]

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पटना : एनआइओएस के डीएलएड को अमान्य ठहराने के मामले में शिक्षा विभाग ने अपनी स्थिति अभी भी साफ नहीं की है. इससे प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन में अपात्र ठहराने की कवायद से प्रदेश के दो लाख से अधिक युवक-युवतियां अनिश्चितता के भंवर में फंस गये हैं.

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18 सितंबर से पंचायतों में नियोजन की प्रक्रिया शुरू होनी है. उन्हें इस प्रक्रिया से वंचित किया जा सकता है. ऐसे में उनकी छटपटाहट सहज ही समझी जा सकती है. इधर, एनसीटीइ के पत्र की व्याख्या भी विवादित हो गयी है. इसको लेकर विभागीय अफसर भी चुप्पी साध गये हैं.
एनआइओएस का दावा है कि 2017 में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मध्यस्थता में एनआइओएस की प्रस्तावित डीएलएड डिग्री को मान्यता बिहार सहित सभी राज्यों ने दी थी. इसका एमओयू हुआ था.
एनआइओएस के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक विद्यार्थियों को जो डीएलएड के डिग्री सर्टिफिकेट दिये जा रहे हैं, उसमें बकायदा एनसीटीइ (नेशनल काउंसिल फाॅर द टीचर एजुकेशन ) का डीएलएड का अप्रूवल नंबर भी दे रहा है.
एनआइओएस अपने स्टैंड पर कायम, सर्टिफिकेट पर एनसीटीइ का अप्रूवल नंबर किया दर्ज : हैरत की बात यह है कि एनसीटीइ ने इस कोर्स की कथित अप्रसांगिकता पर कोई भी पत्र नहीं लिखा है. फिलहाल जिस डीएलएड कोर्स की कथित मान्यता पर सवाल उठ रहे हैं, उसी कोर्स के आधार पर शिक्षा विभाग ने हजारों टीचर नियुक्त कर रखे हैं.
डीएलएडधारी विकास ने साफ किया है कि फ्रेश नियुक्ति में डीएलएड की अमान्यता का सवाल बे-आधार हैं. उन्होंने बताया कि जितने भी लोगों ने डीएलएड किया है, उन्होंने प्राइवेट स्कूलों के यू-डाइस कोड के जरिये ही फाॅर्म भरा था. वे सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों के ही शिक्षक हैं. प्राइवेट व सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के अध्यापन कार्य में अंतर कैसे किया जा सकता है.
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