ऊंची इमारतों पर लगेंगे ठनके से बचाने वाले यंत्र

Published at :22 Aug 2019 7:19 AM (IST)
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ऊंची इमारतों पर लगेंगे ठनके से बचाने वाले यंत्र

आपदा विभाग के निर्देश पर अस्पतालों, स्कूलों और अपार्टमेंट में लगाये जायेंगे यंत्र पटना : राज्य में ठनका गिरने की जानकारी आधा घंटे पहले मिल जाये, इसके लिए राज्य सरकार ने अमेरिकी कंपनी अर्थ नेटवर्क से करार किया है. बहुत जल्द इस सिस्टम का फायदा लोगों को मिलने लगेगा और ठनका गिरने से होने वाली […]

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आपदा विभाग के निर्देश पर अस्पतालों, स्कूलों और अपार्टमेंट में लगाये जायेंगे यंत्र
पटना : राज्य में ठनका गिरने की जानकारी आधा घंटे पहले मिल जाये, इसके लिए राज्य सरकार ने अमेरिकी कंपनी अर्थ नेटवर्क से करार किया है. बहुत जल्द इस सिस्टम का फायदा लोगों को मिलने लगेगा और ठनका गिरने से होने वाली मौत पर रोक लगायी जा सकेगी. इसी कड़ी में विभाग ने नये सभी ऊंचे निजी घर, स्कूल व अस्पतालों में तड़ित चालक यंत्र लगाने का आदेश िदया है. ताकि ऊंचे अपार्टमेंट व घरों में रहने वाले आराम से रहें और उन्हें िकसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़े. आपदा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बिहार के लगभग जिले ठनका से प्रभावित हैं. इसमें 11 जिलों में इसका खतरा ज्यादा रहता है.
बिहार में वज्रपात से पीड़ित जिले
बिहार में मॉनसून के आते ही वज्रपात की संभावना बढ़ जाती है. बिहार में वैसे तो सभी जिलों में वज्रपात होती होती है, लेकिन पटना, भागलपुर, औरंगाबाद, मुंगेर, मुजफफरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, कटिहार, अररिया, जमुई, छपरा, पश्चिम चंपारण, बेगूसराय, बांका, गया, मधेपुरा, जहानाबाद, भोजपुर, सुपौल, पूर्णिया, लखीसराय, नालंदा और नवादा सबसे अधिक प्रभावित रहता है.
डेटा रीडिंग के बाद लोगों तक पहुंचेगी जानकारी
विभाग में मुख्य मॉनीटर रहेगा, जहां बिहार के सभी जिलों के डेटा की रीडिंग होगी. जैसे ही रिडिंग के दौरान यह पता चलेगा कि इस जिले में ठनका गिरने की संभावना है, तो वहां के जिला प्रशासन सहित वार्ड पार्षद को मैसेज किया जायेगा कि इस एरिया में ठनका गिर सकता है. लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाये. वहीं, रेडियो, टीवी व न्यूज से भी हर जिले में होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी जायेगी.
57% मृत्यु मॉनसून के समय
1979-2011 के आंकड़ों को देखें, तो देश में वज्रपात की घटनाएं मॉनसून के पूर्व मार्च से मई के बीच 41.5%, मॉनसून के समय जून से सितंबर 47.2% और मॉनसून के बाद अक्तूबर से नवंबर में 7.7% घटित हुई है. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पाया गया है कि 57% मृत्यु मॉनसून के समय और 31% मृत्यु मॉनसून के पूर्व घटित वज्रपात की घटनाओं से होती है.
2017-18 में यह जिला सबसे संवेदनशील रहा
विभाग के मुताबिक 2017 में भागलपुर, जमुई, पटना, पूर्णिया, बांका, भोजपुर, रोहतास, कटिहार, समस्तीपुर, पश्चिम चंपारण, औरंगाबाद, मधेपुरा, बक्सर, रोहतास संवेदनशील रहा. वहीं, 2018 में मुंगेर, गया, कटिहार, खगड़िया, अररिया, बांका, मधुबनी, कैमूर काफी संवेदनशील रहा.
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