शहर के पांच बड़े फैसलों की पड़ताल, जो वर्षों से फाइलों में सिमटे हैं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Aug 2019 4:49 AM

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जमीन पर होता काम, तो होती बड़ी सहूलियत आम लोगों की सहूलियत व सुविधा को लेकर प्रशासन की ओर से कई घोषणाएं होती रही हैं. शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था को लेकर भी बीते कई वर्षों में कई घोषणाएं प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम व नगर निगम की ओर से भी हुई हैं, जिन्हें कब का पूरा […]

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जमीन पर होता काम, तो होती बड़ी सहूलियत

आम लोगों की सहूलियत व सुविधा को लेकर प्रशासन की ओर से कई घोषणाएं होती रही हैं. शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था को लेकर भी बीते कई वर्षों में कई घोषणाएं प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम व नगर निगम की ओर से भी हुई हैं, जिन्हें कब का पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन वे योजनाएं आज भी केवल फाइलों व आदेशों में सिमटी हैं.
इतना ही नहीं, हर दो से तीन माह पर एक बार अधिकारी उन मुद्दों, उन जगहों का निरीक्षण करते हैं और आदेश दिया जाता है कि अब योजना को तत्काल पूरा करने की कार्रवाई होगी, मगर ऐसा होता नहीं है.
इन्हीं पांच बड़ी योजनाओं की पड़ताल की कहानी, पेश है अनिकेत त्रिवेदी की रिपोर्ट.
गंगा पाथ-वे जगह एप्रोच मार्ग का काम
गंगा पाथ-वे बेली रोड व अशोक राजपथ के बाद शहर का तीसरा प्रमुख मार्ग होगा. लेकिन, इस पाथ-वे को अशोक राजपथ से पांच जगहों पर कनेक्ट करने की योजना भी है. लेकिन, बीते कई वर्षों से मामला केवल फाइलों में है. जानकारी के अनुसार भूमि अधिग्रहण का काम अभी प्रोसेस में है.
गांधी मैदान : अतिक्रमण हटा नहीं हुआ काम
बीते वर्ष गांधी मैदान के पास होटल मौर्या से लेकर होटल पनास के सामने 200 मीटर लंबे भू-भाग को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था. इस दौरान तात्कालिक प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ने जमीन की नापी करा कर वहां पार्क व नगर निगम की ओर से वाहन पार्किंग डेवलप करने के निर्देश भी दिये थे. उस दौरान अतिक्रमण हटा कर पेड़ भी काटे गये, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ.
कितने दिनों में होना था काम
पूरे क्षेत्र के विकास के लिए पथ निर्माण के कार्यपालक अभियंता व नगर निगम को एक माह के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिये गये थे.
फायदा : अगर काम पूरा होता, तो लोगों को वाहन लगाने की सुविधा मिलती. जगह का सौंदर्यीकरण होता. लेकिन अभी जगह पहले से और खराब हो गयी है.
बोरिंग कैनाल रोड
सड़क करनी थी चौड़ी, नहीं हुई
बीते वर्ष जुलाई व अगस्त माह के दौरान अतिक्रमण हटाने के दौरान बोरिंग कैनाल रोड पर हड़ताली मोड़ से लेकर राजापुर पुल तक सड़क के एक तरफ पांच फुट से लेकर 10 फुट तक सड़क के किनारे अवैध निर्माण को तोड़ कर जगह खाली कराया गया. अतिक्रमित हिस्से को भी तोड़ दिया गया, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी वहां सड़क चौड़ी करने या फुटपाथ बनाने का काम नहीं किया गया.
कितने दिनों में होना था काम : इस काम को उस समय तत्काल बिजली के पोल हटाने, फुटपाथ को चौड़ा कर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के निर्देश थे. इसको लेकर प्रमंडलीय आयुक्त व डीएम ने कई बार निरीक्षण भी किया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई.
फायदा : सड़क चौड़ी होती, जाम
की समस्या कम होती. अतिक्रमण नहीं होता.
मल्टी पार्किंग
स्टेशन तक फुट ओवरब्रिज
पटना रेलवे जंक्शन के पास बने मल्टी पार्किंग से स्टेशन के टिकट बुकिंग काउंटर तक फुटओवर ब्रिज बनाने का मामला भी दो वर्षों से अधिक पुराना है. इसको लेकर उस समय प्रमंडलीय आयुक्त कई बार व वर्तमान में डीएम भी निरीक्षण कर चुके हैं. रेलवे के अधिकारियों से भी बात हुई है. लेकिन, योजना अब भी प्रारंभिक स्तर पर है. जानकारी के अनुसार योजना की डीपीआर तक नहीं बनी है.
कब तक पूरा होना था काम: काम पूरा होने की कोई तारीख नहीं रखी गयी थी, मगर दो वर्ष पहले इस मामले को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त ने इतनी तेजी दिखायी थी, तो ऐसा लगता था कि काम जल्द शुरू होगा.
फायदा : लोगों को मल्टी पार्किंग में वाहन लगाने व स्टेशन पर आने में सुविधा होती. स्टेशन गोलंबर का जाम कम होता. बुजुर्ग व अन्य यात्रियों को सुविधा होती.
नालों पर सड़क
पथ निर्माण, तो कभी स्मार्ट सिटी
शहर के बड़े नालों पर सड़क बनाने की महत्वाकांक्षी योजना भी काफी पुरानी है. पहले बुडको को इस योजना की डीपीआर बनाने का निर्देश मिला था.
इसके बाद मामला पथ निर्माण विभाग के पास आया. अब इस पर मंदिरी, बाकरगंज से लेकर अन्य नालों पर सड़क पर नाला बनाने की योजना स्मार्ट सिटी के तहत चली गयी है.
कब तक पूरा होना था काम : अब नयी समय सीमा है कि 2022 तक
सभी नालों पर सड़क बनायी जाये, लेकिन, हालात ऐसे हैं कि बीते छह माह से मंदिरी नाला का टेंडर फाइनल होने के बावजूद कोई काम नहीं हुआ है.
फायदा : पूरे शहर के जाम की समस्या लगभग समाप्त हो जाती. लोगों को नये रास्ते का विकल्प मिलता और नये क्षेत्रों का विकास होता.
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