पटना : आर्ट कॉलेज में फिर मरे दो पक्षी

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बर्ड फ्लू की दहशत. शाम तक दोनों मृत पक्षी कैंपस में ही पड़े रहे पटना : आर्ट कॉलेज परिसर में रविवार को एक चिड़िया की संदेहास्पद मौत के बाद मंगलवार को भी दो पक्षी मृत पाये गये. इनमें एक एक कौआ, जबकि दूसरा कबूतर है. पहले दिन तो उक्त चिड़िया को लेने के लिए पशु […]

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बर्ड फ्लू की दहशत. शाम तक दोनों मृत पक्षी कैंपस में ही पड़े रहे
पटना : आर्ट कॉलेज परिसर में रविवार को एक चिड़िया की संदेहास्पद मौत के बाद मंगलवार को भी दो पक्षी मृत पाये गये. इनमें एक एक कौआ, जबकि दूसरा कबूतर है.
पहले दिन तो उक्त चिड़िया को लेने के लिए पशु व मत्स्य संसाधन विभाग की फॉरेंसिक टीम पहुंची थी. लेकिन, दूसरे दिन उन चिड़ियों को लेने कोई नहीं आया. शाम तक दोनों मृत पक्षी कैंपस में ही पड़े रहे. छात्रों को आशंका है कि कहीं यह बर्ड फ्लू का असर तो नहीं. हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है. छात्रों ने बताया कि जो हेल्पलाइन नंबर दिया गया था उस पर सोमवार को जब सूचना दी गयी, तो उन्होंने कहा कि चिड़िया ठंड से मरी होंगी, घबराने की जरूरत नहीं है.
विंटर वेकेशन को लेकर कॉलेज बंद : उधर, बर्ड फ्लू की जानकारी के बाद चिड़ियाघर को तो पंद्रह दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. लेकिन, पिछले दो दिनों में दो ऐसी घटनाओं के बाद भी आर्ट कॉलेज में छात्र हॉस्टल में रह रहे हैं. हालांकि, विंटर वेकेशन को लेकर कॉलेज बंद हैं.
लेकिन, दो जनवरी को यह खुल जायेगा. वहां रहने वाले छात्र दहशत में हैं. खासकर जो हॉस्टल में रहते हैं. वहां के छात्रों ने बताया कि कोई मास्क भी नहीं लगा रहा. लोग आ रहे हैं और जा रहे हैं. साथ ही इससे आसपास भी लोगों में दहशत का माहौल है. छात्रों ने बताया कि यहां तीन-चार दिन पहले एक कुत्ता भी मरा था. छात्र यह भी आशंका जता रहे हैं कि उसने किसी चिड़िया को खा लिया था, इसलिए उसकी मौत हुई. हालांकि, यह भी पुष्ट नहीं हो सका है कि उसकी मौत कैसे हुई.
26 प्रजाति के पक्षियों के ब्लड सैंपल, मिट्टी और जल के नमूने भी भेजे गये जांच के लिए: पटना जू में सोमवार को 26 प्रजाति के पक्षियों के ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया. बिहार पशु स्वास्थ्य एवं अनुसंधान विभाग के चिकित्सकों के सहयोग से जू के पशु चिकित्सक डॉ आरके पांडेय और डॉ समरेंद्र बहादुर सिंह ने ये रक्त नमूने संग्रहित किये.
इन्हें अच्छी तरह सीलबंद कर हवाई मार्ग से राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजा गया. इसके साथ-साथ संक्रमित केज, उसके आसपास के क्षेत्र और कैट व डॉग प्रजाति के कुछ पशुओं के इनक्लोजर की मिट्टी और पानी का नमूना लेकर भी जांच के लिए भोपाल भेजा गया.

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