पटना : चौथी बार होगी शहर की परीक्षा, अब भी फेल होने का डर
Updated at : 01 Oct 2018 9:24 AM (IST)
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अनिकेत त्रिवेदी जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019, इस बार सर्विस लेवल प्रोग्रेस काफी महत्वपूर्ण पटना : नगर निगम की तरफ से आम शहरियों को दी जाने वाली सुविधाओं और स्वच्छता की स्थिति पर एक बार फिर पटना की परीक्षा होने वाली है. उसे कई मानकों की कसौटी पर कसा जायेगा. फिर जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण […]
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अनिकेत त्रिवेदी
जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019, इस बार सर्विस लेवल प्रोग्रेस काफी महत्वपूर्ण
पटना : नगर निगम की तरफ से आम शहरियों को दी जाने वाली सुविधाओं और स्वच्छता की स्थिति पर एक बार फिर पटना की परीक्षा होने वाली है. उसे कई मानकों की कसौटी पर कसा जायेगा. फिर जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण होने जा रहा है. इस बार यह परीक्षा चार हजार नहीं, पांच हजार अंकों की होगी.
इसमें बेहतर अंक पाने की चुनौती राजधानी पटना के सामने होगी. हालांिक इस परीक्षा के लिए अभी शहर की तैयारी आधी-अधूरी ही है. जनवरी के पहले सप्ताह में शुरू होने वाला स्वच्छता सर्वेक्षण चार भागों में बांट कर किया जायेगा. इसमें शहरों के रैंकिंग में सत्यापन, डाइरेक्ट ऑब्जर्वेशन, सर्विस लेवल प्रोग्रेस और सिटीजन फीडबैक को प्रमुख रूप से रखा गया है. प्रत्येक भाग के लिए 1250-1250 अंक निर्धारित किये गये हैं.
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए बांटे गये भाग
सर्विस लेवल प्रोग्रेस
सर्टिफिकेशन
सर्वेक्षण का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पार्ट सर्टिफिकेशन का है. इसमें भी 1250 निर्धारित किये गये हैं. इसमें विभिन्न मानकों पर शहरों को स्टार रेटिंग दी जायेगी. इसमें सबसे अधिकतम सात स्टार दिया जायेगा जो 1000 हजार अंकों का है. फिर पांच स्टार में 800 अंक, चार स्टार में 600 अंक, तीन स्टार में 500 अंक, दो स्टार में 350 अंक, एक स्टार में 200 अंक निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही खुले में शौच मुक्त को भी इसमें रखा गया है. ओडीएफ पर अधिकतम अंक 250 है.
डाइरेक्ट ऑब्जर्वेशन
सिटीजन फीडबैक
लगातार खराब रही है स्थिति, कब कहां रहा स्थान
स्वच्छता सर्वेक्षण की नियमित शुरुआत 2016 से है. उस समय सर्वेक्षण में 73 शहरों के बीच स्वच्छता की प्रतियोगिता हुई थी. तब मैसूर ने बाजी मारी थी.
इसमें पटना 70वें स्थान पर था. इसके बाद 2017 में स्वच्छता सर्वेक्षण प्रतियोगिता में 434 शहरों ने भाग लिया था. इसमें इंदौर ने बाजी मारी. इसमें भी पटना काे 262वां स्थान मिला था. 2018 में चार हजार दो सौ तीन शहरों ने भाग लिया था. इसमें इंदौर सर्वोच्च रहा. पटना का स्थान राजधानी स्तर में 312वां मिला था, जबकि ऑल ओवर शहरों में पटना का स्थान ही नहीं तय किया गया. इस संदर्भ में बड़ी बात है कि जितने मानकों पर अब तक स्वच्छता सर्वेक्षण की पड़ताल की गयी है, उतने मानकों पर स्थिति नहीं सुधरी है.
शहर की सफाई, कचरा निस्तारण,डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, ठोस कचरा प्रबंधन, सफाई मजदूरों की स्थिति, जन सुविधाओं का स्तर से लेकर अन्य मानकों पर आज भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. ऐसे में अगर फिर पटना स्वच्छता सर्वेक्षण की प्रतियोगिता में लेता है, तो बेहतर परिणाम आने की संभावना कम है.
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