दागी सांसदों की संख्या 87% तक बढ़ी, संगीन अपराध के दोषी जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर लगे रोक
Updated at : 24 Sep 2018 8:41 AM (IST)
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बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर ने की चुनाव आयोग से मांग पटना : बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने संगीन अपराध के दोषी जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने से रोकने की मांग भारत निर्वाचन आयोग से की है. बिहार इलेक्शन वाॅच के राज्य संयोजक राजीव कुमार ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर […]
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बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर ने की चुनाव आयोग से मांग
पटना : बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) ने संगीन अपराध के दोषी जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने से रोकने की मांग भारत निर्वाचन आयोग से की है. बिहार इलेक्शन वाॅच के राज्य संयोजक राजीव कुमार ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि लोकसभा चुनावों में बिहार से चुने जाने वाले सदस्यों में आपराधिक प्रवृति के सांसदों की संख्या बढ़ी है. वर्ष 2004 से वर्ष 2014 के बीच लोकसभा चुनाव लड़ने वाले आपराधिक प्रवृति के उम्मीदवारों में जहां 122 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं इस अवधि में इस प्रवृति के चुने गये सांसदों की संख्या भी 87 फीसदी बढ़ गयी. आम जनता भी बेहतर समाज व राजनीति के लिए अगले चुनाव में आपराधिक प्रवृति के लोगों को चुनने से परहेज करे.
2014 लोकसभा के 70 फीसदी सांसद आपराधिक प्रवृत्ति के
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में 38 फीसदी, वर्ष 2009 में 42 फीसदी और वर्ष 2014 में चुने गये 70 फीसदी बिहारी सांसदों ने अपने ऊपर आपराधिक मामला होने की जानकारी दी थी. इतना ही नहीं, वर्ष 2014 के 50 फीसदी बिहारी लोकसभा सांसदों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. हर लोकसभा चुनाव में इनकी संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है.
12 फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर हो रही सुनवाई
प्रेस कांफ्रेंस में बिहार विवि मुजफ्फरपुर के सेवानिवृत प्रोफेसर रोहताश्व दूबे ने बताया कि राजनीति के आपराधिकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पहल पर 11 राज्यों में 12 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है. इन फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित सुनवाई कर दोषी जनप्रतिनिधियों को सजा दिलाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि ऐसे लोग चुनाव लड़ने के अयोग्य हो सकें. इस मौके पर पटना हाइकोर्ट के अधिवक्ता प्रभाकर कुमार भी उपस्थित रहे.
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