नवादा : रजौली में कब्रिस्तान की घेराबंदी की मांग, डीडीसी को ग्रामीणों ने दिया आवेदन

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कब्रिस्तान के जमीन का नक्शा

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Rajauli Graveyard Fencing : नवादा के रजौली प्रखंड में ग्रामीणों ने कब्रिस्तान की घेराबंदी की मांग को लेकर उप विकास आयुक्त को आवेदन दिया है. जंगली क्षेत्र के पास होने से जानवरों द्वारा कब्रों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना हुआ है. प्रशासन द्वारा कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Rajauli Graveyard Fencing : नवादा के रजौली प्रखंड की सुदूरवर्ती सवैयाटांड़ पंचायत के सिमरातरी गांव स्थित कब्रिस्तान की घेराबंदी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उप विकास आयुक्त शंभू शरण पांडे को आवेदन दिया है. ग्रामीणों ने कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए जल्द चहारदीवारी निर्माण कराने की मांग की है.

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कई गांवों के लिए एकमात्र कब्रिस्तान

आवेदन में सवैयाटांड़ पंचायत के पैक्स अध्यक्ष मो. रियाजुद्दीन, पूर्व मुखिया मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद नसीम अंसारी, मोहम्मद मुनव्वर अंसारी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि सिमरातरी, बारा, सिरसियाटांड़, अकेलवाटांड़, सिन्द्राही और हरिहरपुर सहित कई गांवों का एकमात्र कब्रिस्तान सिमरातरी गांव में स्थित है.

जंगली क्षेत्र के नजदीक होने से परेशानी का दावा

ग्रामीणों के अनुसार कब्रिस्तान खुले में है और जंगली क्षेत्र के समीप होने के कारण वहां जंगली जानवरों का आना-जाना लगा रहता है. इससे कब्रिस्तान की सुरक्षा और पवित्रता को लेकर लोगों को परेशानी होती है. ग्रामीणों ने आवेदन में कई बार जानवरों द्वारा कब्रों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया है.

जमीन सरकारी अभिलेख में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज

ग्रामीणों ने बताया कि कब्रिस्तान की जमीन खाता संख्या 155 तथा प्लॉट संख्या 678 और 680 में दर्ज है. आवेदन के अनुसार दोनों प्लॉट का रकबा क्रमशः 1 एकड़ 16 डिसमिल और 1 एकड़ 74 डिसमिल है. ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी अभिलेख में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है.

फोटो :- सवैयाटांड़ स्थित कब्रिस्तान के जमीन का नक्शा व स्थल का फोटो | Prabhat Khabar Network
कब्रिस्तान के जमीन का स्थल

पहले भी डीएम को दिया जा चुका है आवेदन

ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर इससे पहले जिलाधिकारी को भी आवेदन दिया जा चुका है. इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर रजौली अंचलाधिकारी की ओर से कब्रिस्तान की मापी भी कराई गई थी. हालांकि, मापी के बाद भी घेराबंदी का काम शुरू नहीं होने की बात ग्रामीणों ने कही है.

मापी के बाद भी निर्माण शुरू नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जमीन की मापी की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक चहारदीवारी निर्माण की दिशा में काम शुरू नहीं हुआ है. इससे लोगों में नाराजगी बनी हुई है और वे जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

सुरक्षा के लिए चहारदीवारी की मांग

ग्रामीणों ने डीडीसी से मांग की है कि सिमरातरी कब्रिस्तान की जल्द से जल्द चहारदीवारी कराई जाए. उनका कहना है कि घेराबंदी होने से कब्रिस्तान की सीमा स्पष्ट होगी और जंगली जानवरों के प्रवेश को रोकने में भी मदद मिलेगी.

ग्रामीणों में आक्रोश की बात

आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि लंबे समय से मांग किए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं होने से लोगों में आक्रोश है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में जल्द पहल करने की मांग की है, ताकि कब्रिस्तान की सुरक्षा को लेकर बनी समस्या का समाधान हो सके.

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने कहा है कि यदि जल्द घेराबंदी का काम शुरू नहीं कराया गया तो वे आगे आंदोलन करने को बाध्य होंगे. फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है.

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