नवादा में बिजली से झुलसे बुजुर्ग को 2 KM तक खाट पर ढोना पड़ा, सड़क नहीं होने से एंबुलेंस भी नहीं पहुंची

Author Javed najaf|Edited by Vivek Singh
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खाट पर बुजुर्ग को इलाज के लिए ले जाते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

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नवादा के गेयार गांव में सड़क की कमी एक बार फिर मुसीबत बनी। बिजली से झुलसे एक बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को 2 किलोमीटर तक खाट पर उठाकर ले जाना पड़ा। गांव तक एंबुलेंस न पहुंच पाने से लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश है।

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Nawada News : नवादा जिला के गोविंदपुर प्रखंड के बुधवारा पंचायत स्थित गेयार गांव में सड़क नहीं होने की समस्या एक बार फिर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई. बिजली की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे एक बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा. गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिससे ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी है.

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55 परिवारों का गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित

गेयार गांव में करीब 55 परिवार रहते हैं, जिनमें अधिकांश महादलित और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लोग शामिल हैं. मुख्य पक्की सड़क से गांव की दूरी लगभग दो किलोमीटर है. पूरा रास्ता कच्चा होने के कारण बरसात में कीचड़ और जलजमाव से आवागमन बेहद कठिन हो जाता है. बाइक चलाना भी लगभग असंभव हो जाता है.

बिजली की चपेट में झुलसे बुजुर्ग, खाट पर ले जाना पड़ा अस्पताल

गुरुवार को गांव निवासी करीब 65 वर्षीय ब्रिज किशोर यादव खेत में पटवन कर रहे थे. इसी दौरान वे बिजली की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए. सड़क नहीं होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें खाट पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से इलाज के लिए आगे भेजा गया.

इस दौरान सुधीर चंद्रवंशी, अरविंद कुमार यादव, नीतीश कुमार, प्रिंस कुमार और भूषण कुमार यादव सहित कई ग्रामीणों ने राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

सड़क होती तो समय पर मिलता इलाज

पंच प्रतिनिधि सुधीर चंद्रवंशी ने कहा कि गांव में आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है. कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला. उन्होंने कहा कि यदि सड़क बनी होती तो घायल बुजुर्ग को खाट पर ढोने की नौबत नहीं आती.

2025 में मिला था सड़क निर्माण का आश्वासन

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 में तत्कालीन विधायक मोहम्मद कामरान गांव पहुंचे थे और विधानसभा चुनाव से पहले पक्की सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था. हालांकि निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका. उस समय अस्थायी राहत के तौर पर गड्ढों में बालू और ईंट के टुकड़े डलवाए गए थे, लेकिन बरसात में वह व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त हो गई.

ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान विधायक के पति को भी इस समस्या से अवगत कराया गया है. उनकी ओर से सड़क निर्माण को प्राथमिकता देने का आश्वासन मिला है.

बरसात में कट जाता है गांव का संपर्क

ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है. किसी के बीमार होने या दुर्घटना होने पर मरीज को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक जल्द पक्की सड़क बनाने की मांग की है.


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