नवादा: कुर्की करने पहुंची पुलिस के सामने खुद आ गया फरार वारंटी, नशे में किया हंगामा; कार्रवाई के बीच उठे कई कानूनी सवाल

Author Ashutosh kumar|Edited by Vikash Jha
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कुर्की करने पहुंची पुलिस के सामने खुद आ गया फरार वारंटी, नशे में किया हंगामा, कार्रवाई के बीच उठे कई कानूनी सवाल

नवादा के सिद्धेश्वरपुर गांव में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जहां कुर्की-जब्ती के लिए पहुंची पुलिस टीम के सामने ही शराब के नशे में धुत एक फरार वारंटी हाजिर हो गया. उसने न केवल हंगामा किया, बल्कि पुलिसकर्मियों से उलझ गया.

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Nawada News: नगर थाना क्षेत्र के सिद्धेश्वरपुर गांव में एक ऐसा अजीबोगरीब घटनाक्रम सामने आया जिसने पुलिस कार्रवाई को न केवल नाटकीय मोड़ दे दिया, बल्कि लंबे समय से फरार अभियुक्तों के विरुद्ध वारंट तामील कराने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए.

जिस फरार वारंटी के घर न्यायालय के आदेश पर पुलिस कुर्की-जब्ती की कार्रवाई करने पहुंची थी, वही वारंटी अचानक पुलिस टीम के सामने आ गया. इतना ही नहीं, वह शराब के नशे में धुत्त था और पुलिसकर्मियों से ही उलझ गया.

"हमारे घर कुर्की करने कैसे चले आए?" — नशे में धुत आरोपी ने किया हंगामा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी ने मौके पर पहुंचकर पुलिस से ही सवाल करना शुरू कर दिया कि "आप लोग हमारे घर पर कुर्की करने कैसे चले आए?" इसके बाद उसने कार्रवाई का विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज और हंगामा शुरू कर दिया. काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे काबू में किया और नगर थाना ले आई.

थाने में ब्रेथ एनालाइजर से जांच करने पर उसके शराब पीने की पुष्टि हुई. इसके बाद मद्य निषेध अधिनियम और पुलिस कार्य में बाधा डालने की धाराओं के तहत अलग से प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. गिरफ्तार आरोपी की पहचान सिद्धेश्वरपुर निवासी बबलू कुमार के रूप में हुई है.

कानूनी पहलू: धारा 82 और 83 तक मामला पहुंचने का क्या है अर्थ?

कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में सीधे कुर्की-जब्ती की कार्रवाई नहीं होती:

  1. समन व वारंट: सबसे पहले न्यायालय आरोपी के खिलाफ समन, जमानती वारंट और फिर गैर-जमानती वारंट जारी करता है.
  2. धारा 82 (इश्तेहार/उद्घोषणा): यदि आरोपी लगातार फरार रहता है, तो दंड प्रक्रिया संहिता (अब BNSS) के तहत धारा 82 के अंतर्गत इश्तेहार चिपकाया जाता है.
  3. धारा 83 (कुर्की-जब्ती): इश्तेहार के बावजूद तय समय में उपस्थित न होने पर धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्की का आदेश जारी होता है.

इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने बीत जाते हैं. कुर्की का आदेश इस बात का प्रमाण होता है कि आरोपी लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर था.

घटनाक्रम से उठे कई स्वाभाविक सवाल

इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं:

  • यदि आरोपी वास्तव में लंबे समय से फरार था, तो कुर्की के दौरान अचानक पुलिस के सामने कैसे आ गया?
  • क्या वह अपने घर या आसपास ही मौजूद था?
  • यदि हां, तो पूर्व में उसकी गिरफ्तारी के लिए ठोस प्रयास क्यों नहीं किए गए?

वहीं, जिस व्यक्ति के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई चल रही हो, उसका खुलेआम शराब के नशे में आकर पुलिस से उलझना कानून के प्रति बेखौफ रवैये को दर्शाता है. फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.


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