भूसे से बिजली उत्पादन की योजना अधर में

बिहारशरीफ : वैसे गांव जहां तक बिजली नहीं पहुंची है उसे रोशन करने के लिए भूसे से बिजली उत्पादन की योजना चलायी गयी थी. लेकिन यह योजना माफियों की भेंट चढ़ गयी. रुपये मिलने के बाद भी योजना के लाभ से गांव के लोग महरूम हैं. राज्य सरकार द्वारा समेकित सहकारिता के तहत भूसे से […]
बिहारशरीफ : वैसे गांव जहां तक बिजली नहीं पहुंची है उसे रोशन करने के लिए भूसे से बिजली उत्पादन की योजना चलायी गयी थी. लेकिन यह योजना माफियों की भेंट चढ़ गयी.
रुपये मिलने के बाद भी योजना के लाभ से गांव के लोग महरूम हैं. राज्य सरकार द्वारा समेकित सहकारिता के तहत भूसे से बिजली उत्पादन की यूनिट लगाने की योजना चलायी गयी थी. समेकित सहकारिता विभाग के द्वारा जिले के पांच पैक्स अध्यक्षों को योजना का लाभ दिया गया था. परंतु दुर्भाग्य यह है कि किसी पंचायत चावल के भूसे से बिजली का उत्पादन नहीं हो रही है.
विभाग की माने तो रुपये लेकर सब खा पका गया है. पांच में से तीन पंचायत में योजना पूर्ण तो है मगर अभी चालू नहीं है. दो पंचायत में तो योजना अपूर्ण है. विभाग की माने तो भूसे से बिजली उत्पादन करने के लिए उपकरण सप्लाई करने के लिए जिस एजेंसी को पैसा दिया गया था. उपकरणों की सप्लाई नहीं की गयी.
उपकरण सप्लाई नहीं कनने की स्थिति में एजेंसी पर एफआइआर भी की गयी है. साथ ही जिस पंचायत के पैक्स अध्यक्ष को योजना दी गयी उसके द्वारा भी दिलचस्पी नहीं लिये जाने के कारण ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.
क्या है भूसे से बिजली उत्पादन योजना:
राज्य सरकार द्वारा बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए गैसीफायर योजना चलायी गयी थी. गैसी फायर में चावल कुटने के बाद उससे निकलने वाले भूसे को गैसी फायर में डालकर उससे मशीन में लगे उपकरणोंं के सहयोग से करंट पैदा कर बिजली उत्पादन होता है. उक्त बिजली को सस्ते दर गांव के लोगों को सप्लाई किये जाने का प्रावधान है.
योजना को धरातल पर उतारने के लिए पैक्स अध्यक्षों को अधिकृत किया गया था. इसके लिए नौ लाख दस हजार रुपये हर यूनिट को दिया गया था.
इन पंचायतों को दिया गया है यूनिट
(गोमहर, दनियावा पेंदापुर,मैजरा, रहुई व महमुदा स्त्रोंत: समेकित सहकारिता)
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