तीन पर्वों को लेकर बाजारों में रौनक

Updated at : 17 Sep 2015 9:14 AM (IST)
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तीन पर्वों को लेकर बाजारों में रौनक

तीज, गणेश पूजा व विश्वकर्मा पूजा को ले हो रही खरीदारी बिहारशरीफ : एक साथ तीन पर्व होने से बाजारों में बुधवार को रौनक दिखी. पर्व की खरीदारी को लेकर दुकानों के पास खूब भीड़ दिखी. सड़कों के किनारे दुकानें सजने व लोगों की आवाजाही तेज रहने से शहर के विभिन्न चौराहों पर दिन भर […]

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तीज, गणेश पूजा व विश्वकर्मा पूजा को ले हो रही खरीदारी

बिहारशरीफ : एक साथ तीन पर्व होने से बाजारों में बुधवार को रौनक दिखी. पर्व की खरीदारी को लेकर दुकानों के पास खूब भीड़ दिखी. सड़कों के किनारे दुकानें सजने व लोगों की आवाजाही तेज रहने से शहर के विभिन्न चौराहों पर दिन भर जाम का नजारा दिखा.

तीज, गणपति पूजा व विश्वकर्मा पूजा को लेकर जिले का वातावरण भक्तिमय हो गया है. बुधवार को जहां महिलाओं का अहम पर्व तीज है. वहीं गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा के साथ ही दस दिवसीय गणपति पूजा शुरू हो रही है. महिलाएं जहां तीज पर्व को लेकर खरीदारी कर रही है. वहीं विश्वकर्मा व गणेश पूजा के लिए भी जम कर खरीदारी हो रहा है.

अखंड सुहाग का पर्व तीज:

अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं तीज पर्व करती है. इसे हरितालिका व्रत भी कहा जाता है. महिलाएं अपनी सुहाग की रक्षा व अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती है.

यह पर्व भादो माह के शुक्ल पक्ष तृतीय को मनायी जाता है. इस पर्व के बारे में जानकारी देते हुए पंडित श्रीकांत शर्मा बताते हैं कि गौरी की इच्छा भगवान शिव से शादी करने की थी. जबकि उनके पिता गौरी की शादी विष्णु से करना चाहते थे. गौरी ने अपने मन की बात सहेलियों को बतायी. सहेलियों ने गौरी को अगवा कर निर्जन वन में ले गयी.

वहां गौरी ने मिट्टी का शिवलिंग बना कर उसकी साधना करने लगी. तब भगवान शंकर ने गौरी को दर्शन देकर पति के रूप में होने का वरदान दिया. जिस दिन गौरी को वरदान दिया. जिस दिन वरदान दिया वह भादो माह का शुक्ल पक्ष तृतीया था. तभी से यह व्रत मनाने की परंपरा शुरू हो गयी.

गणपति का पूजा का आगाज आज: गणेश चतुर्थी के अवसर पर सिद्धि विनायक भगवान गणेश का दस दिवसीय पूजनोत्सव गुरुवार से शुरू हो रहा है. इसके लिए शहर में कई जगह भगवान गणेश की प्रतिमा बैठने की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है. पंडाल का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है.

भगवान विश्वकर्मा की पूजा आज:

स्वर्ग लोक से लेकर पृथ्वी लोक के रचयिता भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है. देश भर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को की जाती है.

इस दिन कल कारखाने, औद्योगिक क्षेत्र, लोहे की दुकान, मशीन औजार की दुकान आदि बंद रख कर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में तरक्की होती है.

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