बिहार के पेट्रोल पंपों पर UPI पेमेंट पर नया नियम: 2 हजार से अधिक तेल लेने पर देना होगा कैश, डीलरों का बड़ा फैसला

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15 अक्टूबर 2026 से बिहार के पेट्रोल पंपों पर ₹2000 से अधिक UPI भुगतान स्वीकार नहीं होगा. MDR शुल्क के विरोध में यह बड़ा फैसला लिया गया है. जानें नई भुगतान व्यवस्था.

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पेट्रोल पंप यूपीआई: बिहार पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने राज्यभर के पेट्रोल पंपों पर यूपीआई (UPI) भुगतान को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. एसोसिएशन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, आगामी 15 अक्टूबर 2026 से प्रदेश के किसी भी पेट्रोल पंप पर 2,000 रुपये से अधिक की राशि का भुगतान यूपीआई के माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह कदम डिजिटल लेनदेन पर लगने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ के विरोध में उठाया गया है.

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एमडीआर शुल्क के विरोध में एसोसिएशन का सख्त कदम

बिहार पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक डिजिटल लेनदेन पर 5 रुपये का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लगाया जा रहा है. इस अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर पेट्रोल पंप संचालकों के मुनाफे पर पड़ रहा है. इसी वित्तीय भार से बचने तथा इस शुल्क व्यवस्था के विरोध स्वरूप एसोसिएशन ने यह कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है.

ग्राहकों के लिए नई भुगतान व्यवस्था:

  • 2,000 रुपये तक की सीमा: 2,000 रुपये तक के पेट्रोल या डीजल की खरीद पर यूपीआई भुगतान पूर्व की तरह सुचारू रूप से जारी रहेगा.
  • 2,000 रुपये से ऊपर का बिल: यदि ईंधन का बिल 2,000 रुपये से अधिक होता है, तो ग्राहकों को पूरी राशि का भुगतान अनिवार्य रूप से नकद (कैश) में करना होगा.
  • लागू होने की तिथि: यह नई व्यवस्था पूरे बिहार में 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी.

एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि पहले से सूचना इसलिए दी जा रही है ताकि नियम लागू होने पर ग्राहकों को किसी भी तरह की असुविधा या असमंजस का सामना न करना पड़े. मुजफ्फरपुर जिला पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रामाधार पांडेय ने भी इस निर्णय का पुरजोर समर्थन किया है.

वित्त मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री को भेजा गया पत्र

एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह ने केंद्रीय वित्त मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री और तीनों प्रमुख तेल कंपनियों के चेयरमैन को पत्र प्रेषित किया है. पत्र में याद दिलाया गया है कि वर्ष 2017 में नोटबंदी के बाद जब एमडीआर लाया गया था, तब इसका भार तेल कंपनियों ने उठाया था. ठीक उसी तर्ज पर डीलरों को इस भार से मुक्त रखा जाए. यदि यह शुल्क जबरन पंप मालिकों पर थोपा गया, तो देशव्यापी रणनीति तैयार की जाएगी.

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