नाले के गंदे पानी के बीच बचपन की राह, 6 माह से जलजमाव में फंसी सीमरी की जिंदगी
सीमरी गांव में जल निकासी की समस्या ने 100 परिवारों का जीवन नरक बना दिया है. 6 महीने से गंदा पानी सड़क पर जमा है, जिससे स्थानीय लोग, स्कूली बच्चे और आंगनवाड़ी के नन्हे-मुन्ने परेशान हैं. समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण धरने की चेतावनी दे रहे हैं.
Muzaffarpur News: औराई प्रखंड अंतर्गत आलमपुर सीमरी पंचायत के सीमरी गांव स्थित वार्ड संख्या 9 में जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने से करीब एक सौ परिवारों का जीवन पूरी तरह नारकीय बन चुका है. गांव की यह प्रमुख सड़क सीमरी बाजार को रतवारा और बिंदवारा गांव की लगभग 25 हजार की बड़ी आबादी से सीधे जोड़ती है. पिछले छह माह से सड़क किनारे बने नाले की समुचित निकासी ठप होने के कारण बजबजाता गंदा पानी पूरी सड़क पर फैल चुका है. इस बदबूदार और दूषित पानी के बीच से होकर गुजरना स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए एक रोजमर्रा की सजा बन गया है.
रोज फिसलकर चोटिल हो रहे राहगीर, प्रतिनिधि बेपरवाह
सड़क पर जमा नाले के बदबूदार और काई जमे पानी के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है. स्थानीय समाजसेवी सुबोध चौधरी, रवि कुमार, राहुल कुमार और सूरज कुमार सहित कई ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि इस मार्ग से गुजरने वाले दर्जनों राहगीर और दोपहिया वाहन चालक रोज अनियंत्रित होकर गंदे पानी में गिरते हैं और चोटिल हो जाते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 6 महीने से यह गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन शिकायत के बावजूद कोई भी स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है.
आंगनबाड़ी केंद्र 155 में घटी बच्चों की उपस्थिति
सड़क पर फैले दूषित पानी का सीधा असर प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य पोषण पर भी पड़ रहा है. आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 155 की सेविका पूनम देवी ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग पर नाले का गंदा पानी भरा होने के कारण बच्चों की दैनिक उपस्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है. छोटे-छोटे बच्चों के गंदे पानी में गिरने, संक्रमण फैलने और चोटिल होने के डर से अभिभावक उन्हें केंद्र भेजने से कतरा रहे हैं और हमेशा सुरक्षा को लेकर भयभीत रहते हैं.
'सहयोग' पोर्टल की शिकायत भी बेअसर, धरने की तैयारी में ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए सरकार के आधिकारिक 'सहयोग' पोर्टल पर भी कई बार लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई. प्रशासनिक उपेक्षा और पंचायत प्रतिनिधियों की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है. स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाले की सफाई कराकर जलनिकासी का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे.
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