नगर निकायों को बड़ी राहत: 15 लाख तक की योजनाओं के लिए टेंडर की मजबूरी खत्म

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मुजफ्फरपुर समेत सूबे के नगर निकायों में 15 लाख से कम की योजनाएं फिर से विभाग खुद कराएगा, सरकार ने पुराना आदेश किया बहाल

नगर निकायों को बड़ी राहत: 15 लाख तक की योजनाओं के लिए टेंडर की मजबूरी खत्म

राज्य सरकार ने नगर निकायों को 15 लाख रुपये तक की छोटी विकास योजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया से बड़ी राहत दी है. यह फैसला न केवल कार्यों में तेजी लाएगा, बल्कि ठेकेदारों पर निर्भरता भी कम करेगा. जानें इस नए नियम से किसे और क्या फायदा होगा.

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Municipal Tender Rules: राज्य सरकार ने नगर निकायों को बड़ी राहत देते हुए 15 लाख रुपये से कम लागत वाली विकास योजनाओं के विभागीय कार्यान्वयन की व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया है. अब छोटी विकास योजनाओं को बिना निविदा या ठेकेदार के सीधे विभाग द्वारा ही पूरा कराया जा सकेगा.

नगर विकास विभाग ने वापस लिया पुराना आदेश

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने राज्य के सभी नगर आयुक्तों, नगर परिषद और नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं. नगर निकायों के समक्ष आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों पर विचार करने के बाद विभाग ने 25 फरवरी 2026 को जारी उस आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है, जिसने विभागीय कार्य कराने पर रोक लगाई थी.

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला

  • अनावश्यक देरी से मुक्ति: छोटी योजनाओं के टेंडर में लगने वाले समय के कारण विकास कार्यों में बेवजह देरी हो रही थी.
  • ठेकेदारों की कम रुचि: छोटी राशि के टेंडर में अक्सर संवेदक रुचि नहीं लेते थे, जिससे महत्वपूर्ण काम लटक जाते थे.
  • समस्याओं का त्वरित समाधान: विभागीय स्तर पर काम होने से स्थानीय व नागरिक समस्याओं को तुरंत हल करने में मदद मिलेगी.

इस फैसले से नगर निकायों में कार्यों की रफ्तार तेज होगी और ठेकेदारों पर उनकी निर्भरता काफी कम होगी.

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Premanshu Shekhar

लेखक के बारे में

By Premanshu Shekhar

I have 16 years of journalism experience, working as a Bureau Chief at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on crime,political, social, and current topics.I have experience covering assembly and parliamentary elections reporting.

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