सावधान! 'डिजिटल अरेस्ट' के खौफनाक जाल को तोड़ेगा CBI का 'अभय पोर्टल', ठगों के फर्जी वारंट का होगा पर्दाफाश
सावधान! 'डिजिटल अरेस्ट' के खौफनाक जाल को तोड़ेगा CBI का 'अभय पोर्टल', ठगों के फर्जी वारंट का होगा पर्दाफाश
CBI ने डिजिटल अरेस्ट और फर्जी वारंट की जांच के लिए AI आधारित अभय पोर्टल लॉन्च किया है। अब साइबर ठगी से बचने के लिए ऑनलाइन सत्यता की जांच करना हुआ बेहद आसान।
साइबर फ्रॉड अलर्ट: व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या सीबीआई अफसर बताकर लोगों को कमरों में बंधक बनाने और करोड़ों रुपये ऐंठने वाले 'डिजिटल अरेस्ट' सिंडिकेट की अब खैर नहीं. साइबर अपराधियों के इस सबसे बड़े और खौफनाक हथियार को कुंद करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 'अभय पोर्टल' (AI-आधारित प्लेटफॉर्म) लॉन्च किया है. अब कोई भी फर्जी कोर्ट वारंट, नकली सील या जाली समन देखते ही आम नागरिक ठगी का शिकार होने से पहले एक क्लिक में उसकी असलियत जांच सकेंगे.
आपके शहर में
कमरे में बंधक बनाकर विदेश ट्रांसफर होती है गाढ़ी कमाई
मुजफ्फरपुर सहित पूरे क्षेत्र में शातिर ठग लोगों को डरा-धमकाकर मानसिक रूप से पंगु बना रहे हैं. ठगी का यह संगठित खेल इस तरह चलता है:
- ठग वीडियो कॉल कर मनी लॉन्ड्रिंग या पार्सल में ड्रग्स मिलने का झूठा डर दिखाते हैं.
- कैमरे पर नकली सीबीआई लेटरहेड और फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर पीड़ितों को घर के कमरे में ही कई दिनों तक बंधक (डिजिटल अरेस्ट) बना लेते हैं.
- खाते खाली कराने के बाद इस रकम को 'USDT' (क्रिप्टो करेंसी) में बदलकर विदेशों में बैठे आकाओं तक पहुंचा दिया जाता है.
मुजफ्फरपुर के ताजा मामले: लाखों की लूट का गवाह बना शहर
- केस 1: आमगोला के रिटायर्ड बैंक मैनेजर महेश गामी को 13 दिन बंधक बनाकर 67 लाख रुपये लूटे.
- केस 2: भगवानपुर के 70 वर्षीय बुजुर्ग हरेंद्र कुमार को 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रख 18.25 लाख रुपये ठगे.
- केस 3: सदर थाना क्षेत्र के बुजुर्ग भोला प्रसाद से सीबीआई का खौफ दिखाकर 17 लाख रुपये ऐंठे.
साइबर डीएसपी का बड़ा बयान: 'कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द नहीं'
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने दो टूक कहा है कि देश के किसी भी कानून में ऑनलाइन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है. सरकारी एजेंसियां कभी फोन पर पैसे मांगकर क्लीन चिट नहीं देती हैं.
सुरक्षा चक्र: एक गलती और खाली हो सकता है खाता
- अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल तुरंत काटें और घबराएं नहीं.
- गिरफ्तारी का डर दिखाने पर पैसे ट्रांसफर करने के बजाय सीधे परिजनों व स्थानीय थाने को बताएं.
- साइबर ठगी की आशंका होते ही हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल कॉल दर्ज कराएं.
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