बिहार की एक ऐसी यूनिवर्सिटी, जहां दीमक खा रहे लाखों छात्रों की कॉपियां, सांप के डर से सहमे रहते हैं कर्मचारी...
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 08 Jan 2021 2:17 PM
बीआरए बिहार विवि की 15 लाख कॉपियां दीमक खा रहे हैं. ये कॉपियां विवि के कम्युनिटी हॉल में फेंकी हुई हैं. काॅपियों को रखने का कोई इंतजाम विवि प्रशासन ने नहीं किया है. परीक्षा में कम नंबर आने के बाद इसी ढेर से कॉपियों को छांटा जाता है. हालांकि, इन कॉपियों को छांटने के लिए स्टोर में सिर्फ दो ही कर्मचारी तैनात किये गये हैं. परीक्षा नियंत्रक प्रो मनेाज कुमार का कहना है कि 80 लाख कॉपियां हैं. इनके रखरखाव में परेशानी हो रही है. काॅपियों के निष्पादन और रखरखाव पर जल्द काम शुरू किया जायेगा.
बीआरए बिहार विवि की 15 लाख कॉपियां दीमक खा रहे हैं. ये कॉपियां विवि के कम्युनिटी हॉल में फेंकी हुई हैं. काॅपियों को रखने का कोई इंतजाम विवि प्रशासन ने नहीं किया है. परीक्षा में कम नंबर आने के बाद इसी ढेर से कॉपियों को छांटा जाता है. हालांकि, इन कॉपियों को छांटने के लिए स्टोर में सिर्फ दो ही कर्मचारी तैनात किये गये हैं. परीक्षा नियंत्रक प्रो मनेाज कुमार का कहना है कि 80 लाख कॉपियां हैं. इनके रखरखाव में परेशानी हो रही है. काॅपियों के निष्पादन और रखरखाव पर जल्द काम शुरू किया जायेगा.
कम्युनिटी हॉल में रखी हजारों कॉपियां बरसात में भी भींग चुकी हैं. यहां काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि हॉल में बनी फर्श भी कई जगह से टूट गयी है. निचले तल पर रखी काॅपियां बरसात आने पर खराब होने लगती हैं. छत से भी पानी रिसने लगता है. इससे काॅपियों को बचाये रखना मुश्किल हो जाता है.
कर्मचारियों ने कहा कि स्टोर में कई सांप भी घूम रहे हैं. कई बार कॉपियों को निकालने के दौरान सांप निकल आते हैं. हमलोगों को अंदर काम करने में काफी डर लगता है. कई बार इसकी शिकायत विवि से की जा चुकी है, लेकिन अबतक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. कम्युनिटी हाल में नीचे से लेकर ऊपर तक के हर कमरे में कापियां ठूसी हुई हैं.
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विवि में नियम है कि किसी भी छात्र की काॅपी तीन वर्ष तक रखी जाये. इन तीन वर्ष में अगर कोई छात्र अपने नंबर पर आपत्ति करता है, तो उसकी काॅपी निकाली जाती है और फिर से उसकी जांच की जाती है. तीन वर्ष के बाद कॉपियों को नीलाम कर दिया जाता है. लेकिन विवि कॉपियों को एक वर्ष में ही नीलाम करने पर विचार कर रहा है.
विवि में इस वर्ष से कॉपियों में कोडिंग की गयी है. नयी व्यवस्था के तहत पहली बार पार्ट थर्ड की कॉपियों की जांच की जा रही है. विवि से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि विवि में काॅपियों को सही तरीके से रखने का कोई इंतजाम नहीं है. अगर पुराने तरीके से ही कोडिंग वाली कॉपियों को भी कम्युनिटी हॉल में फेंका गया, तो वे सड़ जायेंगी और उसे निकालने में काफी मुश्किल होगी.
विवि का कम्युनिटी हॉल दो वर्ष से अंधेरे में है. यहां बिजली के तार हैं, पर उसमें करंट नहीं दौड़ती है. कर्मचारियों ने कहा कि अचानक यहां बिजली चली गयी. वर्ष 2018 से यहां बिजली नहीं है. हॉल में नीचे ज्यादा प्रकाश नहीं रहता, इसलिए यहां काम करने में भी दिक्कत होती है.
स्टोर रूम बना विवि का कम्युनिटी हॉल शादी समारोह के लिए बनाया गया था. शिक्षकों ने बताया कि इस कम्युनिटी हॉल से विवि को हर वर्ष छह से सात लाख रुपये की आय होती थी. लेकिन इसे पूर्व कुलपति डॉ विमल कुमार के समय लीज पर दिया गया. उसके बाद यह बंद है. परीक्षा विभाग ने इसे अपना स्टोर बना लिया है.
Posted by: Thakur Shaktilochan
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