राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में 16 जुलाई को किसान-वैज्ञानिक वार्ता, बंपर पैदावार के लिए मिलेंगे टिप्स

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राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में 16 जुलाई को किसान-वैज्ञानिक वार्ता, बंपर पैदावार के लिए मिलेंगे टिप्स

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुशहरी में 16 जुलाई को किसान-वैज्ञानिक वार्ता का आयोजन करेगा। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में लीची की तुड़ाई के बाद बगीचों के प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा होगी।

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 Litchi Farmers Meet: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के स्थापना दिवस के शुभ उपलक्ष्य में मुशहरी स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (NRCL) में आगामी 16 जुलाई को एक विशेष किसान-वैज्ञानिक वार्ता का आयोजन किया जा रहा है.इस महत्वपूर्ण परिचर्चा का मुख्य विषय 'लीची तुड़ाई उपरांत बगीचों का प्रबंधन' रखा गया है.इस दौरान लीची के बेहतर उत्पादन और बागों के रखरखाव को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को कई तकनीकी जानकारियां दी जाएंगी.

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इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर होगी विस्तृत चर्चा, वैज्ञानिक देंगे परामर्श

इस किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी में लीची बागवानी से जुड़े कई तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया जाएगा.इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • लीची के बागों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई-छंटाई करना.
  • पुराने और अनुत्पादक हो चुके लीची बागों का सफल जीर्णोद्धार.
  • वर्षा ऋतु के दौरान छत्रक कीटों का प्रभावी एकीकृत प्रबंधन.
  • पेड़ों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक प्रयोग.
  • आगामी सीजन की बंपर फसल के लिए बगीचे की सही तैयारी.
  • वर्तमान मौसम और जलवायु की परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकें.
  • लीची के नये और छोटे बागों में अंतरवर्तीय (इंटरक्रॉपिंग) फसल प्रणाली अपनाना.

जुलाई का प्रबंधन ही तय करेगा अगले साल की लीची का उत्पादन और गुणवत्ता

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ विकास दास ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जुलाई के महीने में बागों में किए जाने वाले प्रबंधन कार्य ही अगले वर्ष के लीची उत्पादन की मात्रा और फलों की गुणवत्ता को मुख्य रूप से निर्धारित करते हैं.इस समय वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार बगीचों की देखभाल करना बागवानों के लिए अत्यंत आवश्यक है.इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के किसान, बागवान और लीची व्यवसायी अपनी व्यावहारिक समस्याओं को सीधे वैज्ञानिकों के समक्ष रखकर उनका त्वरित तकनीकी समाधान प्राप्त कर सकेंगे.

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