टीबी मरीजों की खोज को घरों में जायेगी मोबाइल वैन
Updated at : 28 Jun 2018 3:43 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : जिले में टीबी मरीजों को खोजने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल वैन अब घर-घर जायेगी. यह मरीजों की जांच कर दो घंटे में जानकारी देगी कि उन्हें टीबी है या नहीं है. स्लम बस्ती में जाकर उन मरीजों की जांच करेगी, जो विभाग से छूटे हुए हैं. 12 जुलाई को पटना […]
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मुजफ्फरपुर : जिले में टीबी मरीजों को खोजने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल वैन अब घर-घर जायेगी. यह मरीजों की जांच कर दो घंटे में जानकारी देगी कि उन्हें टीबी है या नहीं है. स्लम बस्ती में जाकर उन मरीजों की जांच करेगी, जो विभाग से छूटे हुए हैं. 12 जुलाई को पटना में होनेवाली बैठक में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ अमिताभ कुमार सिन्हा मोबाइल वैन के लिए आवेदन देंगे. इसके बाद राज्य सरकार उन्हें वैन उपलब्ध करायेगी.
यह वैन एक सप्ताह के लिए जिले को मिलेगी. वैन जिले के विभिन्न स्लम बिस्तयों में जाकर मरीजों के सैंपल लेकर मौके पर ही उनकी पहचान करेगी. डॉ सिन्हा के अनुसार कुपोषण और अन्य कई कारणों से शहर के स्लम बिस्तयों में रहनेवाले लोग सबसे ज्यादा क्षयरोग की चपेट में आ रहे हैं. इन बिस्तयों में साफ-सफाई का अभाव रहता है. इससे हवा के माध्यम सेहोने वाली यह बीमारी बस्ती केलोगों को जल्दी ही अपनी चपेट में ले लेती है.
बच्चों की विशेष रूप से होगी जांच
डॉ एके सिन्हा का कहना है कि मोबाइल वैन स्लम इलाकों में जांच के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी करेगी. इस दौरान शून्य से छह साल तक के बच्चों की विशेष रूप से जांच की जायेगी. इस प्रयास के जरिए क्षयरोग के मरीजों की सही स्थिति का पता लगाकर उनका समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि इसका इलाज छह से आठ महीने तक लगातार चलता है. बीच में दवा छोड़ने पर बीमारी दोबारा घेर लेती है.
नवीनतम उपकरणों से लैस है मोबाइल वैन : क्षयरोगियों की सही स्थिति का पता लगाकर उन्हें समय पर इलाज की सुविधाएं देने के लिए को केंद्र सरकार से कार्ट्रिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिड एंपलीफिकेशन टेस्ट (सीबीएनएएटी) मशीन व नवीनतम उपकरणों से लैस मोबाइल वैन है. इस मशीन से टीबी की जांच मात्र दो घंटे में हो जायेगी.
यह मोबाइल वैन सूबे के सभी जिलों में बारी-बारी जायेगी. हर जिले में खासकर झुग्गी-झोंपड़ियों वाले इलाकों में जाकर मरीजों की पहचान करेगी. इससे जिले में मौजूद टीबी के मरीजों को वास्तविक आंकड़ा सामने आ जायेगा. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को टीबी के मरीजों का इलाज करने में आसानी हो जायेगी.
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