मुंगेर संन्यासपीठ में चातुर्मास अनुष्ठान शुरू, दो माह तक योग, भागवत कथा, महायज्ञ व आध्यात्मिक आयोजनों की धूम

संन्यासपीठ में चातुर्मास अनुष्ठान के शुभारंभ की तस्वीर | Prabhat Khabar Network
Munger Spiritual Event : मुंगेर के संन्यासपीठ में चातुर्मास अनुष्ठान-2026 का शुभारंभ हुआ है, जो 30 जुलाई से 26 सितंबर तक चलेगा. इस महाआयोजन में योग, मंत्र साधना, श्रीमद्भागवत कथा, महायज्ञ और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
Munger Spiritual Event : बिहार स्कूल ऑफ योग से संबद्ध संन्यासपीठ, पादुका दर्शन परिसर में गुरुवार से चातुर्मास अनुष्ठान-2026 का शुभारंभ हो गया. 30 जुलाई से 26 सितंबर तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाआयोजन में योग, मंत्र साधना, श्रीमद्भागवत कथा, महायज्ञ और अनेक धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
श्रावणी योग साधना से हुई आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत
चातुर्मास अनुष्ठान के पहले दिन एक माह तक चलने वाली श्रावणी योग साधना का शुभारंभ हुआ. प्रतिदिन सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक आयोजित होने वाले इस सत्र का उद्देश्य लोगों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ बनाना है. इसके साथ ही प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से 4 बजे तक श्रावणी मंत्र साधना का भी आयोजन किया जा रहा है. रामचरितमानस मास पारायण, ध्यान, जप और अन्य नियमित साधना सत्र पूरे महीने चलते रहेंगे.
भागवत कथा से लेकर श्रीकृष्ण आराधना तक होंगे विशेष आयोजन
संन्यासपीठ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 7 और 8 अगस्त को सिद्ध रागियों का शब्द कीर्तन होगा. 10 से 15 अगस्त तक मानस कोकिला श्रीमती कृष्णा देवी के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा. 17 अगस्त को सिंह संक्रांति, 20 से 23 अगस्त तक ‘वायु इकोलॉजी’ विषय पर विशेष सत्र तथा 26 से 28 अगस्त तक श्रीकृष्ण आराधना आयोजित होगी. 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा.
महायज्ञ और उत्तरकांड कथा होंगे आकर्षण का केंद्र
चातुर्मास अनुष्ठान के अंतिम चरण में 8 से 12 सितंबर तक श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा. 17 सितंबर को कन्या संक्रांति एवं रामार्चन तथा 21 से 25 सितंबर तक उत्तरकांड कथा का आयोजन होगा. 26 सितंबर को वैदिक विधि-विधान के साथ चातुर्मास अनुष्ठान का समापन किया जाएगा.
श्रद्धालुओं से अधिक भागीदारी की अपील
संन्यासपीठ प्रबंधन ने मुंगेरवासियों, योग साधकों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है. प्रबंधन का कहना है कि चातुर्मास अनुष्ठान भारतीय योग परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने एवं आत्मसात करने का एक दुर्लभ अवसर है, जिसमें देश-विदेश से आने वाले साधकों की सहभागिता पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी.
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