मुंगेर में 5 लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में, 10 दिनों से खतरे के निशान के ऊपर गंगा

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मुंगेर जिले में बाढ़ का कहर जारी है, 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और गंगा खतरे के निशान से 10 दिनों से ऊपर बह रही है. लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, जबकि सरकारी सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.

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मुंगेर : जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. गंगा करीब 10 दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में 5.07 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है. दियारा क्षेत्र से लेकर मुंगेर, बरियारपुर, धरहरा, जमालपुर सहित विभिन्न इलाकों में लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं.

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जिले की 38 पंचायतों के 384 गांव और नगर निकाय के 11 वार्ड बाढ़ प्रभावित हैं. बड़ी संख्या में परिवार घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लिये हुए हैं. प्रशासन की ओर से भोजन-पानी और पॉलिथीन शीट समेत अन्य राहत सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है, लेकिन लंबे समय से जारी बाढ़ के कारण लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है.

घर लौटने की चाहत, रोजगार की भी चिंता

बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता घर वापसी की है. पानी कब उतरेगा और कब वे अपने घर लौट सकेंगे, इसे लेकर लोग परेशान हैं. दूसरी ओर लगातार कई दिनों से घर और काम से दूर रहने के कारण रोजी-रोजगार की चिंता भी बढ़ती जा रही है.

मुंगेर में बाढ़ कोई नयी बात नहीं है. खासकर दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए हर साल बाढ़ की स्थिति सामने आती है. लेकिन इस बार बाढ़ का असर लंबे समय तक बने रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं.

4 सितंबर के बाद बढ़ा पानी का फैलाव

पिछले पखवाड़े से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण जिले के निचले इलाके जलमग्न हैं. 4 सितंबर को गंगा के खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद पानी का फैलाव और व्यापक हो गया.

मुंगेर किला के आसपास का क्षेत्र और एनएच-80 भी प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी ठिकाना बना हुआ है. जमालपुर-बरियारपुर रेलखंड के किनारे भी कई परिवार शरण लिये हुए हैं.

सड़क किनारे, बबुआघाट, समाहरणालय के समीप और अन्य ऊंचे स्थानों पर भी बाढ़ प्रभावित परिवारों ने डेरा डाल रखा है.

35 हजार पॉलिथीन शीट बांटी गयीं, फिर भी मांग जारी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से पॉलिथीन शीट का वितरण लगातार किया जा रहा है. लोगों के पास पक्का आशियाना नहीं होने की स्थिति में यही पॉलिथीन धूप और बारिश से बचाव का साधन बन रही है.

प्रशासन के अनुसार अब तक 35 हजार पॉलिथीन शीट का वितरण किया जा चुका है. इसके बावजूद प्रभावित इलाकों से इसकी मांग लगातार सामने आ रही है.

मवेशियों के लिए चारे की भी बढ़ी परेशानी

बाढ़ के कारण हजारों परिवार अपने मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण लिये हुए हैं. जहां जगह मिल रही है, वहीं पशुओं को बांधकर रखा जा रहा है.

शहरी इलाकों और मुख्य सड़कों के किनारे रह रहे पशुपालकों तक सरकारी पशुचारा अपेक्षाकृत आसानी से पहुंच रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे मवेशियों के साथ रह रहे परिवारों तक चारा पहुंचाने में परेशानी हो रही है.

बड़े पशुओं के लिए करीब 5 किलो सूखा भूसा प्रति पशु उपलब्ध कराया जा रहा है. पशुपालकों का कहना है कि गाय और भैंस एक बार में इससे अधिक भूसा खा जाती हैं. हरा चारा उपलब्ध नहीं होने के कारण दुधारू पशुओं पर भी असर पड़ रहा है. पशुपालकों के अनुसार कम भोजन मिलने से दूध का उत्पादन घट गया है.

कई प्रमुख सड़कों पर अब भी पानी

बाढ़ का असर आवागमन पर भी पड़ा है. श्रीकृष्ण सेतु से शहर को जोड़ने वाली लालदरवाजा-गीताबाबू रोड करीब तीन फीट पानी में डूबी हुई है. इसके कारण करीब 10 दिनों से इस मार्ग पर आवागमन बाधित है.

वहीं मुंगेर-सीताकुंड मुख्य मार्ग को एनएच-80 से जोड़ने वाले कल्याणचक-हरदियाबाद रोड पर भी पानी जमा है. इस मार्ग पर करीब 15 दिनों से आवागमन पूरी तरह बाधित बताया जा रहा है.

एनएच-80, फोरलेन, एनएच-333बी और एनएच-333 के कई हिस्सों में सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी जमा है. ऐसे में वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है.

फोरलेन पर बाढ़ के पानी में गिरा वाहन

बरियारपुर में शनिवार रात फोरलेन से एक बड़ा वाहन बाढ़ के पानी में जा गिरा. हादसे में चालक किसी तरह बच गया. सड़क के आसपास पानी जमा रहने और कई जगहों पर जलभराव के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है.

लंबे समय से जारी बाढ़ ने मुंगेर में सिर्फ घर और सड़क ही नहीं, बल्कि लोगों की रोजी-रोटी और पशुपालन को भी प्रभावित किया है. ऐसे में बाढ़ का पानी घटने का इंतजार कर रहे परिवारों के सामने अब घर वापसी के साथ रोजगार और आजीविका को पटरी पर लाने की चुनौती भी है.

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