जमालपुर में बैंककर्मियों की हड़ताल से ठप रही बैंकिंग सेवा, सड़कों पर उतरे कर्मचारी
विभिन्न बैंकों के बैंक कर्मी | Prabhat Khabar Network
जमालपुर में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं. बैंककर्मियों ने अपनी सात प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, जिससे ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा.
Jamalpur Bank Employees Strike: बैंक से जुड़े काम के लिए शुक्रवार को जमालपुर में पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के तहत शहर के बैंककर्मी भी काम से दूर रहे. बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने के साथ कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध जताया.
सुबह से ही बैंककर्मी बैंक ऑफ बड़ौदा की जमालपुर शाखा के पास जुटने लगे. इसके बाद कर्मचारियों ने शहर के विभिन्न बाजारों और मुख्य मार्गों पर जुलूस निकाला. प्रदर्शन के दौरान निजी बैंकों को भी बंद कराने का प्रयास किया गया. कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाये और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की.
सात प्रमुख मांगों को लेकर कर्मचारियों का विरोध
प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया बैंकिंग एम्पलाइज एसोसिएशन के असिस्टेंट सेक्रेटरी अंशुमन कुमार और यूको बैंक के अभिनव कुमार ने किया. कर्मचारियों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआइ व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठायी.
इसके अलावा पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तत्काल लागू करने, बैंकों में खाली पदों पर पर्याप्त और स्थायी भर्ती करने तथा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग भी प्रदर्शन के केंद्र में रही.
कर्मचारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और विलय पर रोक लगाने के साथ पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की भी मांग की.
नोटबंदी और कोरोना का हवाला देकर सरकार पर सवाल
प्रदर्शनकारी बैंककर्मियों ने कहा कि नोटबंदी, जनधन योजना और कोरोना महामारी जैसी परिस्थितियों में बैंक कर्मचारियों ने जोखिम के बीच काम किया और बैंकिंग व्यवस्था को चालू रखने में अपनी भूमिका निभायी. उनका कहना था कि इसके बावजूद लंबे समय से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है.
कर्मचारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुनाफे का भी मुद्दा उठाया. उनका सवाल था कि जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लगातार लाभ कमा रहे हैं और सरकार को राजस्व दे रहे हैं, तो फिर उनके निजीकरण और विलय की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है.
प्रदर्शनकारियों ने बड़े कॉरपोरेट ऋणों और आम लोगों से ऋण वसूली के मुद्दे पर भी सरकार की नीतियों की आलोचना की. ये सभी बातें प्रदर्शनकारी बैंककर्मियों की ओर से कही गयीं.
बैंक बंद रहने से ग्राहकों पर पड़ा असर
हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज प्रभावित रहा. इससे नकद निकासी, जमा, चेक और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए शाखाओं पर निर्भर ग्राहकों को परेशानी हुई. हालांकि डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी वैकल्पिक सेवाएं उपलब्ध रहने की स्थिति में ग्राहकों के कुछ काम जारी रहे होंगे, लेकिन शाखा आधारित सेवाएं हड़ताल से प्रभावित रहीं.
बैंककर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में पर्याप्त मानव संसाधन और बेहतर कार्य परिस्थितियों से भी जुड़ी हैं. खाली पदों पर स्थायी भर्ती और पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह जैसी मांगों को लेकर उनका तर्क है कि इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव कम होगा और सेवा व्यवस्था बेहतर हो सकेगी.
Jamalpur Bank Employees Strike: जमालपुर में बड़ी संख्या में बैंककर्मी हुए शामिल
प्रदर्शन में बैंक ऑफ बड़ौदा से अंशुमन कुमार, चंदन झा, अमित कुमार और पूजा कुमारी, सेंट्रल बैंक से निमिषा कुमारी, बैंक ऑफ इंडिया से तनुजा कुमारी और रजनीश कुमार, यूको बैंक से अभिनव कुमार, इंडियन बैंक से रतन माला और विनोद, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से स्वाति कुमारी, ग्रामीण बैंक से गौतम झा और यूनियन बैंक से अखिलेश्वर हेंब्रम सहित अन्य बैंककर्मी शामिल हुए.
कर्मचारियों ने कहा कि जब तक लंबित मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक संगठन स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जायेगा.
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