मुंगेर: हवेली खड़गपुर में जागृति साहित्य मंच की काव्य गोष्ठी, कवियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की उठाई मांग

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हिंदी दिवस पखवाड़ा के काव्य गोष्ठी में मौजूद कवि व साहित्यकार. | Prabhat Khabar Network

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हवेली खड़गपुर में जागृति साहित्य मंच द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला. कवियों ने अपनी रचनाओं से हिंदी के प्रति सम्मान व्यक्त किया और इसे राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की.

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हवेली खड़गपुर (मुंगेर). हिंदी दिवस पखवाड़ा के तहत रविवार को जागृति साहित्य मंच, हवेली खड़गपुर की ओर से काव्य गोष्ठी आयोजित की गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन मंच अध्यक्ष ज्योतिष चंद्र ने किया. गोष्ठी में स्थानीय साहित्यकारों और कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व, साहित्य में उसके योगदान और नई पीढ़ी के बीच हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने की आवश्यकता पर विचार रखे.

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कवियों ने रचनाओं के जरिए हिंदी के प्रति जताया प्रेम

काव्य गोष्ठी के दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त किया. कवि नित्यानंद नेपाली ने अपनी रचना के माध्यम से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की बात कही. उन्होंने हिंदी का मान अखिल विश्व के मंच पर बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उनकी प्रस्तुति को मौजूद साहित्यप्रेमियों ने सराहा.

हिंदी और देश की प्रगति को लेकर रखे विचार

अधिवक्ता जितेंद्र कुमार ने अपनी रचना के माध्यम से हिंदी के विस्तार और देश की प्रगति की कामना की. उन्होंने कविता के जरिए बेहतर और विकसित भारत की कल्पना को सामने रखा.

वहीं मंच अध्यक्ष ज्योतिष चंद्र ने कविता पाठ करते हुए हिंदी को सशक्त भाषा बताया और इसके व्यापक उपयोग पर जोर दिया.

अध्यात्म और विज्ञान से जोड़ा हिंदी का महत्व

अधिवक्ता सह कवि अमरदीप कुमार अमर ने कहा कि हिंदी अध्यात्म, विज्ञान और विभिन्न भाषाओं के बीच अपनी उपयोगिता और अभिव्यक्ति क्षमता के कारण महत्वपूर्ण भाषा है. उन्होंने देश के विभिन्न कार्यालयों में अधिक से अधिक कार्य हिंदी में किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से हिंदी को देश की सांस्कृतिक पहचान और लोगों को जोड़ने वाली भाषा के रूप में प्रस्तुत किया.

पुरुषोत्तम शास्त्री सहित अन्य कवियों ने किया काव्य पाठ

कवि पुरुषोत्तम शास्त्री ने भी अपनी कविता प्रस्तुत की. इसके अलावा अन्य साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर गोष्ठी को साहित्यिक रंग प्रदान किया. कविताओं और विचारों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता और सम्मान का संदेश दिया गया.

नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने पर जोर

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और विविधता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा भी है. ऐसे साहित्यिक आयोजनों से नई पीढ़ी में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि एवं जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है.

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