मुंगेर में गर्भधारण पूर्व देखभाल पर जिला स्तरीय कार्यशाला, हाई रिस्क प्रेगनेंसी और मातृ मृत्यु दर घटाने पर जोर

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद सिविल सर्जन व अन्य. | Prabhat Khabar Network

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मुंगेर में गर्भधारण से पहले महिलाओं की देखभाल के लिए एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई. इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और परिवार नियोजन जैसी अहम जानकारियां दी गईं.

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मुंगेर के प्री-फेब्रिकेटेड अस्पताल सभागार में सिविल सर्जन डॉ. राजू की अध्यक्षता में गर्भधारण पूर्व देखभाल से संबंधित जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी. कार्यशाला में जमालपुर और सदर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया. स्वास्थ्य विभाग के सहयोगी संस्था जपाइगो की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में एम्स पटना से आयीं डॉ. दीपिका अग्रवाल ने प्रतिभागियों को गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी.

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खान-पान से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक दी गयी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं के खान-पान, सिर से पैर तक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, परिवार नियोजन, मानसिक स्वास्थ्य और विभिन्न प्रकार की आवश्यक जांच के बारे में जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को इस तरह तैयार करना था कि वे गर्भधारण से पहले ही महिलाओं और योग्य दंपत्तियों को जरूरी स्वास्थ्य सावधानियों के प्रति जागरूक कर सकें.

सदर और जमालपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ कार्यक्रम

जपाइगो की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी निगार कौसर और वरीय कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. आनंद दीक्षित ने बताया कि गर्भधारण पूर्व देखभाल कार्यक्रम को मुंगेर सदर और जमालपुर प्रखंड में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है. इसके तहत आशा कार्यकर्ताओं की मदद से 15 वर्ष से अधिक उम्र की किशोरियों से लेकर 49 वर्ष तक के योग्य दंपत्तियों को गर्भधारण से पहले बरती जाने वाली स्वास्थ्य सावधानियों के प्रति जागरूक किया जाना है.

गर्भधारण से तीन माह पहले फोलिक एसिड पर जोर

कार्यक्रम के तहत गर्भधारण से करीब तीन माह पहले फोलिक एसिड के सेवन को लेकर भी महिलाओं को जानकारी दी जा रही है. प्रशिक्षण में बताया गया कि गर्भधारण के दौरान महिलाओं में खून की कमी समेत कई स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं. रक्तचाप, लंबाई के अनुसार वजन, मधुमेह और मानसिक स्वास्थ्य जैसी स्थितियों की पहले से पहचान और प्रबंधन जरूरी है.

मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर

जपाइगो की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया कि गर्भधारण से पहले बरती गयी सावधानी से हाई रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों को कम करने में मदद मिल सकती है. इससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहयोग मिलेगा. वहीं गर्भधारण पूर्व स्वास्थ्य पर ध्यान देने से प्रसव के बाद बच्चे में कुछ जन्मजात समस्याओं, कुपोषण और कम वजन की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है.

उन्होंने बताया कि इसका सकारात्मक असर महिला और परिवार के साथ स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं पर भी पड़ेगा. एनआरसी, एसएनसीयू और परिवार नियोजन कार्यक्रम पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में गर्भधारण पूर्व देखभाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में जिला कार्यक्रम प्रबंधक फैजान आलम अशरफी, डीसीएम निखिल राज, डीपीसी सुजीत कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग एवं जपाइगो के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

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