दीदारगंज पैक्स गोदाम के 5.23 लाख रुपये का हिसाब गायब! मापी पुस्तिका में भी नहीं मिला उल्लेख, पूर्व अध्यक्ष-प्रबंधक को नोटिस

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निर्माणाधीन पैक्स में गोदाम | Prabhat Khabar Network

दीदारगंज पैक्स में 1000 एमटी क्षमता के गोदाम निर्माण में बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है. ₹5.23 लाख के खर्च का कोई लेखा-जोखा नहीं मिलने पर सहकारिता विभाग ने पैक्स के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक को नोटिस जारी किया है. विभाग ने तत्काल राशि जमा कराने का निर्देश दिया है.

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Munger News: मुंगेर के दीदारगंज पैक्स में बन रहे 1000 एमटी क्षमता के गोदाम के निर्माण में खर्च हुई राशि के हिसाब को लेकर सहकारिता विभाग ने गंभीर आपत्ति जतायी है. गोदाम निर्माण के लिए पैक्स को मिली कुल राशि में से 5 लाख 23 हजार 831 रुपये के खर्च का अभिश्रव और मापी पुस्तिका में कोई उल्लेख नहीं मिला है. विभाग ने इसे वित्तीय अनियमितता का द्योतक माना है.

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मामला सामने आने के बाद जिला सहकारिता पदाधिकारी ने पैक्स के पूर्व अध्यक्ष चिंटू कुमार और प्रबंधक को नोटिस जारी किया है. विभाग ने संबंधित राशि का हिसाब उपलब्ध कराने के साथ उसे समिति के विशेष बचत खाते में जमा कराने का निर्देश भी दिया है. निर्देश का पालन नहीं होने पर विधिसम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है.

43.60 लाख रुपये मिले, हिसाब में 5.23 लाख का अंतर

1000 एमटी क्षमता वाले गोदाम के निर्माण के लिए दीदारगंज पैक्स को विभाग की ओर से दो किस्तों में कुल 43 लाख 60 हजार 772 रुपये उपलब्ध कराये गये थे.

विभाग के अनुसार पहली किस्त के रूप में 23 सितंबर 2025 को 21 लाख 80 हजार 386 रुपये जारी किये गये थे. इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को इतनी ही राशि की दूसरी किस्त उपलब्ध करायी गयी.

इस तरह गोदाम निर्माण के लिए पैक्स को कुल 43,60,772 रुपये मिले. लेकिन बाद में उपलब्ध करायी गयी मापी पुस्तिका की जांच में पूरी राशि के खर्च का विवरण नहीं मिला.

मापी पुस्तिका में सिर्फ 38.36 लाख के काम का उल्लेख

पूर्व पैक्स अध्यक्ष की ओर से कार्यालय में उपलब्ध करायी गयी मापी पुस्तिका की जांच में 38 लाख 36 हजार 941 रुपये के कार्य का ही उल्लेख पाया गया.

विभाग के अनुसार पैक्स को उपलब्ध करायी गयी कुल राशि और मापी पुस्तिका में दर्ज कार्य की राशि के बीच 5 लाख 23 हजार 831 रुपये का अंतर है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्माण के लिए उपलब्ध करायी गयी इस राशि में से बाकी रकम कहां और किस मद में खर्च हुई.

विभागीय जांच के दौरान इस अंतर वाली राशि से संबंधित अभिश्रव अथवा अन्य लेखा दस्तावेज भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराये गये.

चुनाव खत्म होने के बाद भी नहीं मिला हिसाब

जिला सहकारिता पदाधिकारी ने इस स्थिति को खेदजनक बताया है. खास बात यह है कि पैक्स चुनाव भी अब पूरा हो चुका है.

विभाग के अनुसार दीदारगंज पैक्स का चुनाव 7 फरवरी 2026 को संपन्न हो गया था. इसके बावजूद निर्माण के लिए उपलब्ध करायी गयी शेष राशि का हिसाब और उससे संबंधित अभिश्रव अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया.

यानी पैक्स की नयी व्यवस्था अस्तित्व में आने के बाद भी पुरानी राशि के खर्च का पूरा लेखा-जोखा विभाग के सामने नहीं आया है.

पूर्व अध्यक्ष को 5.23 लाख जमा कराने का निर्देश

जिला सहकारिता पदाधिकारी ने पूर्व अध्यक्ष चिंटू कुमार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि नोटिस प्राप्त होते ही 5 लाख 23 हजार 831 रुपये समिति के विशेष बचत खाते में जमा कराना सुनिश्चित करें.

इसके साथ ही राशि के खर्च से संबंधित आवश्यक अभिश्रव और अन्य अभिलेख भी उपलब्ध कराने को कहा गया है.

विभाग का यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्माण के लिए जारी सरकारी राशि के खर्च का दस्तावेजी हिसाब उपलब्ध होना जरूरी है. मापी पुस्तिका में दर्ज कार्य और उपलब्ध राशि में अंतर मिलने के बाद अब विभाग संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना चाहता है.

हिसाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई

सहकारिता विभाग ने मामले में स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी.

अब पूर्व अध्यक्ष और प्रबंधक की ओर से विभाग को क्या दस्तावेज उपलब्ध कराये जाते हैं और 5.23 लाख रुपये के अंतर की स्थिति कैसे स्पष्ट की जाती है, इस पर नजर रहेगी.

यदि संबंधित राशि के खर्च का वैध अभिलेख उपलब्ध कराया जाता है तो मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है. वहीं यदि राशि का संतोषजनक हिसाब या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं, तो विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ सकती है.

Munger News:निर्माणाधीन गोदाम पर भी उठे सवाल

दीदारगंज पैक्स में 1000 एमटी क्षमता का गोदाम निर्माणाधीन है. ऐसे में निर्माण कार्य के साथ उसकी लागत और भुगतान का पारदर्शी हिसाब भी महत्वपूर्ण है.

सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में मापी पुस्तिका, अभिश्रव और अन्य लेखा दस्तावेज खर्च की पुष्टि के प्रमुख आधार होते हैं. इसी वजह से 5.23 लाख रुपये की राशि का मापी पुस्तिका में उल्लेख नहीं मिलने और संबंधित अभिश्रव उपलब्ध नहीं होने को विभाग ने गंभीरता से लिया है.

अब विभागीय नोटिस के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्ष की ओर से उपलब्ध कराये जाने वाले दस्तावेज और राशि के हिसाब पर निर्भर करेगी.

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