AI से बदलेगा इंजीनियरिंग का भविष्य, मुंगेर में विशेषज्ञ ने छात्रों को बताये नये तकनीकी अवसर
. कार्यक्रम को संबोधित करते प्रो. एके. नायक | Prabhat Khabar Network
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकें इंजीनियरिंग के भविष्य को नया आकार दे रही हैं. राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय मुंगेर में आयोजित विशेषज्ञ वार्ता में छात्रों को भविष्य की टेक्नोलॉजी और करियर के नए अवसरों के बारे में विस्तार से बताया गया.
AI In Engineering Future: इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब केवल किताबों और पारंपरिक तकनीक तक सीमित नहीं रहने वाली है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा, रोबोटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें आने वाले समय में इंजीनियरिंग के काम करने के तरीके को बदलेंगी. विद्यार्थियों को इन्हीं तकनीकी बदलावों और रोजगार के नये अवसरों से परिचित कराने के लिए राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय मुंगेर में रविवार को विशेषज्ञ वार्ता आयोजित की गयी.
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‘Recent Trends in ICT for Future Ready Engineering & Technology’ विषय पर आयोजित इस वार्ता में कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एवं इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, नागालैंड के प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) एके. नायक ने विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक और उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
AI से नौकरी नहीं, काम करने का तरीका बदलेगा
मुख्य वक्ता प्रो. नायक ने विद्यार्थियों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल नौकरी खत्म करने वाली तकनीक के रूप में देखने की जरूरत नहीं है. AI आने वाले समय में नौकरियों के स्वरूप में बदलाव लायेगा और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर भी पैदा करेगा.
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के शुरुआती दौर से ही खुद को बदलती तकनीक के लिए तैयार करें. इसके लिए प्रोग्रामिंग, समस्या समाधान और डेटा विश्लेषण जैसे कौशल विकसित करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि भविष्य में वही विद्यार्थी अधिक अवसर हासिल कर सकेंगे, जो अपनी पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी कौशल को भी जोड़ेंगे.
Civil से Electrical तक AI का इस्तेमाल
प्रो. नायक ने बताया कि AI का इस्तेमाल केवल कंप्यूटर और आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है. सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में भी इसके व्यावहारिक उपयोग तेजी से बढ़ रहे हैं.
सिविल इंजीनियरिंग में AI की मदद से संरचनात्मक दोषों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. ड्रोन के जरिये निर्माण स्थलों की निगरानी और इमारतों में क्रैक डिटेक्शन जैसी तकनीकों में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है.
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में रोबोटिक्स, नेविगेशन और स्वचालित प्रणालियों में AI की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है. वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्मार्ट ग्रिड, पावर सिस्टम ऑप्टिमाइजेशन, फॉल्ट डिटेक्शन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
IoT से Quantum Computing तक बदल रही तकनीक
विशेषज्ञ वार्ता में विद्यार्थियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी यानी ICT के बदलते स्वरूप से भी अवगत कराया गया. प्रो. नायक ने Internet of Things (IoT), Big Data Analytics, Cloud Computing, 5G, Blockchain, Quantum Computing, Edge Computing और Industry 4.0/5.0 जैसी तकनीकों के बारे में चर्चा की.
उन्होंने बताया कि ये तकनीकें भविष्य में उद्योगों के काम करने के तरीके, उत्पादन व्यवस्था और तकनीकी सेवाओं को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगी.
विद्यार्थियों के लिए इसका मतलब केवल नयी तकनीक सीखना नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग की समस्याओं को तकनीक के जरिये हल करने की क्षमता विकसित करना भी है.
डिजिटल तकनीक ने शिक्षा का तरीका भी बदला
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर भारती ने प्रो. नायक का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने काम को आसान बनाने के साथ विकास की गति को भी तेज किया है. लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन माध्यम से शैक्षणिक कार्य संचालित होने का उदाहरण देते हुए उन्होंने डिजिटल तकनीक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला.
AI In Engineering Future: विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर
कार्यक्रम का संयोजन गोपाल कृष्ण ने किया. विशेषज्ञ वार्ता के दौरान विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के साथ खुद को तैयार करने और इंजीनियरिंग शिक्षा को आधुनिक कौशल से जोड़ने का संदेश दिया गया.
कार्यक्रम में हेमंत कुमार भगत, उज्ज्वल कुमार, अभिषेक कुमार चौधरी, रोमिला कुमारी सहित अन्य संकाय सदस्य मौजूद थे.
राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में आयोजित यह विशेषज्ञ वार्ता विद्यार्थियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इसमें AI और आधुनिक तकनीक को केवल सैद्धांतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के व्यावहारिक उपयोग से जोड़कर समझाया गया.
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