एक एंबुलेंस के भरोसे है तीन लाख की आबादी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Sep 2016 4:08 AM

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पिछले छह महीने से हड़ताल पर है 1099 एंबुलेंस के चालक व इएमटी मुंगेर : सदर अस्पताल में एंबुलेंस की बदहाल व्यवस्था के कारण ओड़िशा के कालाहाड़ी में हुई घटना की पुनरावृति मुंगेर में हो सकती है़ कहने को तो सदर अस्पताल में सात एंबुलेंस उपलब्ध हैं, किंतु रोगियों के लिए मात्र एक की व्यवस्था […]

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पिछले छह महीने से हड़ताल पर है 1099 एंबुलेंस के चालक व इएमटी

मुंगेर : सदर अस्पताल में एंबुलेंस की बदहाल व्यवस्था के कारण ओड़िशा के कालाहाड़ी में हुई घटना की पुनरावृति मुंगेर में हो सकती है़ कहने को तो सदर अस्पताल में सात एंबुलेंस उपलब्ध हैं, किंतु रोगियों के लिए मात्र एक की व्यवस्था है. जिसके कारण गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भागलपुर या पटना ले जाने में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है़ वहीं कई बार समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण कई असहाय व गरीब मरीजों की जान तक चली जाती है़ बावजूद अस्पताल प्रबंधन मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा.
एंबुलेंस के अभाव में जा चुकी है मरीज की जान : सदर अस्पताल में एंबुलेंस का अभाव मरीजों की जानें ले रही है़ बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसके लिए ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है़ विदित हो कि 24 मई को गंभीर अवस्था में सदर अस्पताल में इलाजरत एक विद्युतकर्मी को एंबुलेंस के अभाव में पटना नहीं ले जाया जा सका, अंतत: उनकी मौत हो गयी़ जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जम कर हंगामा भी किया. मालूम हो कि पिछले महीने ओड़िशा के कालाहाड़ी स्थित आदीवासी समुदाय के दाना मांझी की पत्नी के मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया था. जिसके कारण वह अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठा कर ले जाना पड़ा था और यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था.
छह माह से बंद है 1099 एंबुलेंस : पिछले मार्च महीने से सदर अस्पताल में 1099 का दो एंबुलेंस तथा एक शव वाहन बंद पड़ा हुआ है़ इस एंबुलेंस के चालक तथा इएमटी लंबित मानदेय भुगतान की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं. जिसके कारण अस्पताल परिसर में 1099 का तीन एंबुलेंस इन दिनों शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है़ इलाज के दौरान यदि किसी मरीज की मौत हो जाती है, तो गरीब तबके के लोगों को शव ले जाने के लिए ठेले व जुगाड़ की व्यवस्था करनी पड़ती है़ वहीं जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा एंबुलेंस को चालू करवाने के बजाय, उसके चालक को अपने निजी वाहन का चालक बना लिया है़
10 माह से बंद पड़ा है 108 एंबुलेंस : 108 नंबर एंबुलेंस की संविदा पिछले साल नवंबर में ही खत्म हो गया है़ जिसके बाद से यह बिल्कुल बंद पड़ा हुआ है़ किंतु अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसे चालू किये जाने को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है़ वहीं एंबुलेंस को लेकर मरीजों की परेशानियां दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है़ इतने दिनों से एंबुलेंस के बंद रहने के कारण वाहन में जंख लग रहा है.
दो में एक 102 नंबर का एंबुलेंस खराब : सदर अस्पताल में 102 नंबर का दो एंबुलेंस उपलब्ध है़ किंतु एक खराब पड़ा हुआ है, जिसे ठीक करवाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने पटना भेज रखा है़ फलत: एक ही एंबुलेंस के भरोसे मरीजों का इलाज चल रहा है़ जिसके कारण गंभीर मरीजों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है़ वहीं सांसद कोटे का भी एक एंबुलेंस अस्पताल को उपलब्ध कराया गया है़ किंतु इसका उपयोग इन दिनों चलंत चिकित्सक दल के वाहन के रूप में किया जा रहा है़
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक : अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि महीनों से बंद पड़े एंबुलेंसों को चालू करने के लिए पहल चल रही है़ जल्द ही अस्पताल के सभी एंबुलेंस को चालू कर दिया जायेगा़
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