पांच अपराधियों को सात-सात वर्ष सजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2016 8:52 AM
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12 जुलाई 2014 को बम व पिस्तौल के साथ प्लाई वुड व्यवसायी के यहां डकैती की योजना बनाते हुए सभी अपराधी को पकड़ा गया था. दो साल बाद उन्हें सश्रम कारावास की सजा मिली. मुंगेर : मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश पंचम ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने बम व पिस्तौल के साथ अपराध की योजना बनाने […]
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12 जुलाई 2014 को बम व पिस्तौल के साथ प्लाई वुड व्यवसायी के यहां डकैती की योजना बनाते हुए सभी अपराधी को पकड़ा गया था. दो साल बाद उन्हें सश्रम कारावास की सजा मिली.
मुंगेर : मुंगेर के अपर सत्र न्यायाधीश पंचम ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने बम व पिस्तौल के साथ अपराध की योजना बनाने के मामले में पकड़े गये पांच अपराधियों को दोषी पाकर सोमवार को सात-सात वर्षों के सश्रम कारावास की सजा सुनायी है.
सत्रवाद संख्या 854/14 में सुनवाई करते हुए अपराधी अजय कुमार, प्रिंस कुमार, विकास कुमार, सोनू कुमार एवं दयानंद कुशवाहा को भारतीय दंड विधान की धारा 399 एवं 402 में जहां सात-सात वर्ष सश्रम कारावास एवं दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी गयी. वहीं शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत तीन वर्ष व पांच वर्ष कारावास की सजा दी गयी है. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर अपर लोक अभियोजक संदीप कुमार भट्टाचार्या ने बहस में भाग लिया.
घटना के संदर्भ में बताया जाता है कि 12 जुलाई 2014 को कोतवाली थाना पुलिस द्वारा शहर के श्रवण बाजार स्थित एक होटल में छापामार कर अपराधी विकास कुमार, अजय कुमार व सोनू कुमार को गिरफ्तार किया था. उसके पास से सूतरी बम व लोडेड पिस्तौल बरामद किया गया था. इन अपराधियों के बयान के आधार पर घोषीटोला के प्रिंस कुमार यादव व घोषीटोला के दयानंद कुशवाहा को भी अभियुक्त बनाया गया था. इन लोगों ने पुलिस को बताया था कि ये लोग शहर के बड़ा बाजार स्थित एक प्लाइवुड व्यवसायी के प्रतिष्ठान में डकैती की योजना बना रहे थे.
विकास कुमार व सोनू जहां नयाटोला चंदनबाग का रहने वाला है. वहीं अजय कुमार घोषीटोला का रहने वाला है. विकास ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कहा था कि वे लोग कुख्यात अपराधी प्रशांत मिश्रा व सूरजा उर्फ झरकहवा के लिए काम करता है.
इस मामले में कोतवाली थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिन्हा के बयान पर कोतवाली कांड संख्या 195/14 दर्ज की गयी थी. जिसमें उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर पांच लोगों को दोषी पाकर सजा सुनायी गयी.
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